

Yadav Ji Ki Love Story: सिनेमाई पर्दे पर अक्सर प्यार और तकरार की कहानियां देखने को मिलती हैं, लेकिन जब कोई फिल्म सामाजिक सद्भाव को दांव पर लगा दे, तब विवादों का बवंडर उठना तय है। हालिया रिलीज ‘यादव जी की लव स्टोरी’ इसी तूफान के केंद्र में है, जिसने उत्तर प्रदेश की सियासत में भी भूचाल ला दिया है।
Yadav Ji Ki Love Story: विवादों से घिरी ‘यादव जी की लव स्टोरी’, सपा विधायक पंकज मलिक ने सेंसर बोर्ड पर उठाए गंभीर सवाल
लखनऊ में 19 फरवरी को ‘यादव जी की लव स्टोरी’ फिल्म को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। समाजवादी पार्टी के विधायक पंकज मलिक ने इस फिल्म के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई है और सीधे तौर पर सरकार व सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि देश और प्रदेश में जानबूझकर ऐसे विवाद पैदा किए जा रहे हैं, जिसका एकमात्र उद्देश्य समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांटना है।
विधायक मलिक ने तंज कसते हुए कहा, ”जब तक यह सरकार सत्ता में रहेगी, तब तक कभी धर्म के नाम पर तो कभी जाति के नाम पर लोगों को आपस में लड़ाने का काम होता रहेगा”। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मस्जिद के लाउडस्पीकर पर हंगामा खड़ा किया गया और अब किसी खास जाति को निशाना बनाकर माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। अब तो फिल्मों को भी समाज को बांटने का हथियार बनाया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Yadav Ji Ki Love Story: जातिवाद के आरोप और सियासी हंगामा
समाजवादी पार्टी के विधायक ने विशेष रूप से केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की जिम्मेदारी पर निशाना साधा। उन्होंने हैरानी जताई कि अगर कोई फिल्म समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती है, तो उसे रिलीज की मंजूरी कैसे मिल गई। उन्होंने कहा कि Censor Board का यह कर्तव्य था कि वह ऐसे संवेदनशील कंटेंट पर पहले ही रोक लगाता। यह Censor Board की नैतिक जिम्मेदारी थी कि वह किसी भी ऐसे कंटेंट को पारित न करे जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़े।
पंकज मलिक ने पुरानी घटनाओं को याद दिलाते हुए ‘घूसखोर पंडित’ जैसी फिल्मों के विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लगातार ऐसी फिल्मों का सामने आना समाज में तनाव बढ़ाने की सोची-समझी साजिश लगती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर फिल्में बनानी ही हैं, तो उन महान हस्तियों और नेताओं पर बनें, जिन्होंने देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
सेंसर बोर्ड की भूमिका पर गहराते सवाल
विधायक मलिक ने उदाहरण देते हुए कहा कि नेताजी मुलायम सिंह यादव, चौधरी चरण सिंह, महात्मा गांधी और भगत सिंह जैसे महापुरुषों पर आधारित फिल्में बननी चाहिए, ताकि हमारी युवा पीढ़ी को सही दिशा मिल सके। इन नेताओं ने समाज और प्रदेश के उत्थान के लिए अथक कार्य किया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ‘यादव जी की लव स्टोरी’ फिल्म की कड़ी निंदा करते हुए उन्होंने सरकार से इस मामले का संज्ञान लेने और भविष्य में ऐसी विवादित फिल्मों पर रोक लगाने की मांग की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस तरह की फिल्मों से समाज में गलत संदेश जाता है और वैमनस्यता बढ़ती है।


