

Arjun Tree: बिहार में औषधीय पौधों से उद्योग को मिलेगी नई उड़ान, अर्जुन वृक्ष पर विशेष फोकस। जब प्रकृति की कोख से निकली औषधि ही रोगों का निवारण बन जाए, तो समझिए एक नए युग का सूत्रपात हो रहा है। बिहार अब इसी दिशा में अग्रसर है, जहां औषधीय पौधों की खेती और प्रसंस्करण से न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य के हर्बल उद्योग को भी नई पहचान मिलेगी।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने हाल ही में विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि बिहार में हर्बल और आयुर्वेदिक उद्योग को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। उन्होंने विशेष रूप से अर्जुन वृक्ष (टर्मिनलिया अर्जुन) का जिक्र किया, जिसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है।
मंगल पांडेय ने बताया कि अर्जुन वृक्ष की छाल का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों दोनों में ही प्रमुखता से किया जाता है। विशेषकर हृदय संबंधी बीमारियों के उपचार में इसकी भूमिका अतुलनीय है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह कार्डियक टॉनिक के रूप में भी जाना जाता है और हृदय की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने में सहायक है।
हर्बल उद्योग को मिलेगा सरकारी प्रोत्साहन
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार इस क्षेत्र में निवेश और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे न केवल स्थानीय किसानों को अर्जुन वृक्ष और अन्य औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
यह पहल बिहार को देश के प्रमुख हर्बल उत्पादक राज्यों की सूची में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आयुर्वेदिक औषधियों की बढ़ती मांग को देखते हुए, यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
हृदय रोगों में लाभकारी अर्जुन वृक्ष की छाल: एक संजीवनी बूटी
आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में अर्जुन वृक्ष को हृदय रोगों के लिए एक प्रमुख औषधि के रूप में वर्णित किया गया है। इसकी छाल में पाए जाने वाले विशेष घटक जैसे टैनिन, ग्लाइकोसाइड्स, फ्लेवोनोइड्स और खनिज हृदय के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह रक्तचाप को नियंत्रित करने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी सहायक मानी जाती है।
आधुनिक विज्ञान भी अर्जुन वृक्ष के औषधीय गुणों की पुष्टि करता है। कई शोध अध्ययनों ने हृदय स्वास्थ्य पर इसके सकारात्मक प्रभावों को उजागर किया है, जिससे इसकी वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ी है। बिहार सरकार की यह पहल राज्य को इस महत्वपूर्ण संसाधन का अधिकतम लाभ उठाने में सक्षम बनाएगी।
किसानों और अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
इस परियोजना से किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए तकनीकी सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और वे पारंपरिक फसलों के अलावा मूल्यवान औषधीय पौधों की खेती की ओर आकर्षित होंगे। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि लाने में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
कुल मिलाकर, बिहार में हर्बल और आयुर्वेदिक उद्योग को बढ़ावा देने की यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास को भी गति देगी। अर्जुन वृक्ष जैसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधों पर ध्यान केंद्रित करना एक दूरदर्शी कदम है।



