

Forex Reserve: वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और रुपये में जारी गिरावट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार एक नए ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है, जो संकट के समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की क्षमता रखता है।
# भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर, रुपये की चिंताएं बरकरार
## विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड उछाल: अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 8.66 अरब डॉलर बढ़कर 725.72 अरब डॉलर के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा भारत की बढ़ती आर्थिक स्थिरता और बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता को दर्शाता है। इससे पहले, 6 फरवरी को समाप्त सप्ताह में इसमें 6.71 अरब डॉलर की गिरावट देखी गई थी, जब यह 717.06 अरब डॉलर पर था। जनवरी में पिछला रिकॉर्ड 723.774 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। यह महत्वपूर्ण वृद्धि ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित टकराव की आशंका से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हो रही है।
आरबीआई के मुताबिक, समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA), 3.55 अरब डॉलर बढ़कर 573.60 अरब डॉलर हो गईं। इन परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है, जिन्हें डॉलर में दर्शाया जाता है। यह वृद्धि वैश्विक मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये की स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
स्वर्ण भंडार का मूल्य भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, जो 4.99 अरब डॉलर बढ़कर 128.46 अरब डॉलर हो गया है। इसके अतिरिक्त, विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 10.3 करोड़ डॉलर की वृद्धि हुई, जिससे यह 18.92 अरब डॉलर पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत की आरक्षित स्थिति में भी 1.9 करोड़ डॉलर का इजाफा देखा गया है, जो अब 4.734 अरब डॉलर है।
## रुपये पर दबाव बरकरार: वैश्विक कारक और विश्लेषण
विदेशी मुद्रा भंडार में इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बावजूद, भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 31 पैसे गिरकर 90.99 (अस्थायी) पर बंद हुआ। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.94 पर खुला और कारोबार के दौरान 91.04 के निचले स्तर तक पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू शेयर बाजार में तेजी का रुख भी रुपये को मजबूती प्रदान करने में नाकाम रहा। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिका-ईरान तनाव जैसे वैश्विक कारकों ने निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर डाला, जिसका सीधा प्रभाव रुपये की कीमत पर पड़ा। करेंसी मार्केट में यह उतार-चढ़ाव भारत की व्यापारिक स्थिति और आयात-निर्यात लागत को प्रभावित कर सकता है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/। यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दोहरी चुनौती पेश करती है, जहां एक ओर देश का भंडार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू मुद्रा कमजोर हो रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
हालांकि विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है, यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में है, फिर भी रुपये की गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है। सरकार और आरबीआई को रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए उपयुक्त मौद्रिक नीतियों और हस्तक्षेपों पर विचार करना होगा ताकि भारत की आर्थिक विकास दर पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



