

Bihar Sugar Mills: दशकों की खामोशी के बाद, खेतों में फिर से रौनक लौटने को तैयार है। बंद पड़ी चीनी मिलों की चिमनियां एक बार फिर धुआं उगलेंगी, जो किसानों के चेहरों पर मिठास बिखेरेंगी।
बिहार शुगर मिल्स: सकरी और रैयाम चीनी मिलों को मिला नया जीवन, हजारों किसानों को फायदा
दरभंगा और मधुबनी के किसानों के लिए बिहार शुगर मिल्स का महत्व
Bihar Sugar Mills: राज्य सरकार ने दशकों से बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों को फिर से चालू करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह कदम दरभंगा और मधुबनी जिलों के 2401 गांवों के गन्ना किसानों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है। गन्ना उद्योग विभाग ने शुक्रवार को इन दोनों मिलों के लिए गांवों का आरक्षण कर दिया है, जिससे वे सीधे किसानों से गन्ना खरीद सकेंगी। रैयाम चीनी मिल के लिए 1018 गांव और सकरी चीनी मिल के लिए 1383 गांव आरक्षित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर बनी यह कार्ययोजना सहकारिता विभाग के माध्यम से इन मिलों का संचालन सुनिश्चित करेगी। विभाग ने मिलों को पर्याप्त गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक रूप से गांवों का चयन किया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सकरी और रैयाम मिलों को गन्ना आपूर्ति के लिए आरक्षित गांव
सकरी चीनी मिल को मधुबनी जिले के 686 गांव और दरभंगा जिले के 697 गांवों के किसान गन्ना देंगे, जिससे कुल 1383 गांवों से गन्ना आपूर्ति होगी। वहीं, रैयाम चीनी मिल को मधुबनी जिले के 438 गांव और दरभंगा जिले के 580 गांवों के किसान अपनी उपज बेचेंगे, जो कुल 1018 गांवों से गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। इन दोनों चीनी मिलों के पुनरुद्धार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा बल मिलेगा और किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य मिल पाएगा।
किसानों के लिए आरक्षित किए गए गांवों का विवरण इस प्रकार है:
सकरी चीनी मिल के लिए (मधुबनी जिला – 686 गांव):** अंध्राथाढ़ी, बबुरही, घोघाडीहा, झंझारपुर, लडनिया, लखनउर, लौकहां, लौकही, माधेपुर, पंडौर, फुलपरास और राजनगर प्रखंड।
सकरी चीनी मिल के लिए (दरभंगा जिला – 697 गांव): बरही, मनिगांछी, टारडीह, अलिनगर, बेनीपुर, बिरौल, धनश्यामपुर, गौरा बौराम, किरातपुर, कुशेश्वर स्थान, कुशेश्वर स्थान पूर्वी तथा दरभंगा प्रखंड।
रैयाम चीनी मिल के लिए (दरभंगा जिला – 580 गांव): बहादुरपुर, हायाघाट, हनुमाननगर, जाले, सिंघवारा और कोइरी प्रखंड।
रैयाम चीनी मिल के लिए (मधुबनी जिला – 438 गांव):** बासोपट्टी, बेनीपट्टी, बिस्फी, हरलाखी, जयनगर, कलुहीं, खजौली, रहिका और माधवापुर प्रखंड।
यह आरक्षण सुनिश्चित करेगा कि दोनों मिलों को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक कच्चा माल उपलब्ध हो सके। यह सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है और क्षेत्र में कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पुनर्जीवित चीनी मिलों का ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
बंद पड़ी चीनी मिलों का फिर से चालू होना न केवल गन्ना किसानों के लिए रोजगार और आय के अवसर पैदा करेगा, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सहायक उद्योगों और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। यह एक दूरदर्शी कदम है जो बिहार के कृषि परिदृश्य में एक नई मिठास घोलने को तैयार है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस पहल से स्थानीय स्तर पर नौकरियों का सृजन होगा और पलायन की समस्या को कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।



