

Electric Car: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य बेहद उज्ज्वल दिख रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस इलेक्ट्रिक क्रांति का हम आज अनुभव कर रहे हैं, उसकी नींव दशकों पहले ही रखी जा चुकी थी? आज जब हर महीने नई इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च हो रही हैं, तो यह जानना दिलचस्प हो जाता है कि देश की सड़कों पर दौड़ने वाली पहली इलेक्ट्रिक कार आखिर कौन सी थी और उसकी क्या खासियतें थीं। यह उस समय की बात है जब ‘इलेक्ट्रिक’ शब्द आज जितना आम नहीं था।
भारत में इलेक्ट्रिक कारों का बढ़ता क्रेज किसी से छिपा नहीं है। आज हर बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी अपनी इलेक्ट्रिक पेशकश बाजार में उतार रही है, लेकिन भारतीय ऑटोमोबाइल इतिहास में एक ऐसा अध्याय भी है, जब इलेक्ट्रिक वाहन सिर्फ एक अवधारणा नहीं, बल्कि वास्तविकता बन चुके थे। हम बात कर रहे हैं आज से लगभग 33 साल पहले लॉन्च हुई भारत की पहली इलेक्ट्रिक कार की, जिसने उस समय की तकनीकी सीमाओं के बावजूद एक नई दिशा दी। यह सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि भविष्य की झलक थी।
भारत में पहली इलेक्ट्रिक कार: दशकों पहले ही तय हो गया था सुनहरा भविष्य
इलेक्ट्रिक कार: क्या थी देश की पहली EV की खासियत?
आज की आधुनिक इलेक्ट्रिक कारों की तुलना में, उस दौर की पहली इलेक्ट्रिक कार बेशक फीचर्स और परफॉर्मेंस के मामले में उतनी उन्नत नहीं थी, लेकिन अपने समय के हिसाब से यह किसी चमत्कार से कम नहीं थी। उस दौर की तकनीक को ध्यान में रखते हुए, इस वाहन को शहरी आवागमन और कम दूरी की यात्राओं के लिए डिज़ाइन किया गया होगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण-अनुकूल होना था, जो आज भी इलेक्ट्रिक वाहनों का मुख्य आकर्षण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उस समय इसका मुख्य उद्देश्य पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करना और स्वच्छ परिवहन का एक विकल्प प्रदान करना रहा होगा। इसकी Battery Range सीमित होने के बावजूद, यह अपनी श्रेणी में एक अग्रणी प्रयास था।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- शहरी आवागमन के लिए उपयुक्त कॉम्पैक्ट डिज़ाइन।
- शून्य उत्सर्जन, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आती थी।
- कम रखरखाव लागत (अनुमानित)।
- शांत ड्राइविंग अनुभव।
- सरल ड्राइविंग मैकेनिज्म।
तकनीकी और प्रदर्शन का एक शुरुआती अध्याय
भारत की पहली इलेक्ट्रिक कार के लिए, इंजन या पावरट्रेन के संदर्भ में, यह निश्चित रूप से आज के शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर से काफी अलग था। उस समय की तकनीक के अनुसार, इसमें एक DC इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल किया गया होगा, जो पर्याप्त टॉर्क के साथ शहरी गति के लिए पर्याप्त पावर प्रदान करता होगा।
- संभावित पावरट्रेन विवरण:
- मोटर प्रकार: DC इलेक्ट्रिक मोटर (लगभग 5-10 kW की पावर)।
- बैटरी: लीड-एसिड बैटरी पैक (क्षमता लगभग 10-15 kWh)।
- अधिकतम गति: लगभग 50-60 किमी/घंटा।
- चार्जिंग समय: लंबा, संभवतः 8-10 घंटे।
भले ही ये आंकड़े आज के मानकों से बहुत कम लगें, लेकिन 33 साल पहले ये एक महत्वपूर्ण कदम था। इसकी Battery Range एक चार्ज पर लगभग 60-80 किलोमीटर रही होगी, जो उस समय के हिसाब से शहर के भीतर की जरूरतों के लिए पर्याप्त मानी जाती थी। लेटेस्ट कार और बाइक अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें
आधुनिक इलेक्ट्रिक क्रांति की नींव
आज जब हम टाटा नेक्सन ईवी (Tata Nexon EV), एमजी जेडएस ईवी (MG ZS EV) और महिंद्रा एक्सयूवी400 (Mahindra XUV400) जैसी कारों को सड़कों पर देखते हैं, तो हमें उस पहली इलेक्ट्रिक कार के योगदान को नहीं भूलना चाहिए। यह सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं था, बल्कि एक दूरदर्शी सोच का परिणाम था जिसने दिखाया कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहन संभव हैं। इसकी लॉन्चिंग ने भविष्य के लिए एक राह तैयार की, जिस पर चलकर आज कई कंपनियां सफल हो रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आज, इलेक्ट्रिक कारों में फास्ट चार्जिंग, लंबी रेंज, बेहतर सेफ्टी फीचर्स और कनेक्टेड टेक्नोलॉजी जैसी सुविधाएं आम हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पहली इलेक्ट्रिक कार ने एक छोटा कदम उठाया था, लेकिन इसने भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कैसे हम एक greener भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि नवाचार की कोई सीमा नहीं होती।


