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फ़रवरी, 21, 2026
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रहमत, बरकत और माफी का पाक महीना Ramzan 2026… पढ़िए रोजा, तरावीह, जकात, फितरा और आत्मशुद्धि

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Ramzan 2026: इस्लामी कैलेंडर का नवां महीना रमजान, इबादत और आत्मशुद्धि का वह पवित्र समय है जब दुनिया भर के मुसलमान अल्लाह की रहमत और बरकत पाने के लिए रोजे रखते हैं। यह महीना सब्र, त्याग, अनुशासन और इंसानियत का संदेश देता है, जिसमें हर मोमिन खुद को अल्लाह के करीब महसूस करता है। इस पाक महीने में रोजा, तरावीह, जकात और फितरा के जरिए अल्लाह की इबादत की जाती है, जिससे रूहानी सुकून मिलता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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रहमत, बरकत और माफी का पाक महीना Ramzan 2026

रमजान का महत्व

रमजान को इस्लामी धर्म में सबसे पाक महीना माना जाता है। इस दौरान मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक खाने-पीने से परहेज करते हुए रोजे रखते हैं। रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने, बुरे विचारों और कर्मों से दूर रहने और अल्लाह की याद में लीन रहने का माध्यम है। यह महीना तौबा (पश्चाताप), दुआ (प्रार्थना) और इस्तगफार (माफी मांगने) के लिए खास होता है। यह आत्मिक शुद्धिकरण और अल्लाह से करीबी बढ़ाने का एक अद्भुत अवसर प्रदान करता है।

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Ramzan 2026: रोजा, तरावीह और इंसानियत का संदेश

रमजान के प्रमुख अनुष्ठान

रमजान के दौरान कई महत्वपूर्ण अनुष्ठान किए जाते हैं जो इस महीने को और भी खास बनाते हैं।

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रोजा: आत्मशुद्धि का माध्यम

रोजा, जिसे उपवास भी कहते हैं, रमजान का सबसे प्रमुख स्तंभ है। यह मुसलमानों को संयम, धैर्य और गरीबों के प्रति सहानुभूति सिखाता है। सहरी (सूर्योदय से पहले भोजन) और इफ्तार (सूर्यास्त के बाद भोजन) रोजे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इफ्तार अक्सर परिवार और दोस्तों के साथ किया जाता है, जो सामुदायिक एकता को बढ़ावा देता है।

तरावीह: विशेष नमाज

रमजान में इशा की नमाज के बाद तरावीह नामक विशेष नमाज अदा की जाती है। इसमें कुरान के कुछ हिस्सों का पाठ किया जाता है, जिससे मुसलमान पूरे महीने में कुरान को पूरा सुन पाते हैं। यह नमाज आत्मिक शांति और धार्मिक ज्ञान को बढ़ाती है।

जकात और फितरा: इंसानियत की मिसाल

रमजान में जकात (अनिवार्य दान) और फितरा (रमजान के अंत में दिया जाने वाला दान) का भी विशेष महत्व है। जकात अमीरों द्वारा गरीबों को दिया जाता है, जिससे समाज में आर्थिक समानता आती है। फितरा ईद-उल-फितर से पहले अदा किया जाता है ताकि गरीब भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें। यह इंसानियत और परोपकार का सबसे बड़ा उदाहरण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

रमजान की समाप्ति: ईद-उल-फितर

रमजान का महीना ईद-उल-फितर के साथ समाप्त होता है, जो मुसलमानों का एक प्रमुख त्योहार है। ईद पर नए कपड़े पहने जाते हैं, विशेष पकवान बनाए जाते हैं और सभी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं। यह रमजान के पूरे महीने की तपस्या और इबादत का इनाम होता है।

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निष्कर्ष और उपाय

रमजान का महीना केवल भूख-प्यास सहने का नहीं, बल्कि अपनी आत्मा को शुद्ध करने, अल्लाह के करीब आने और समाज में भाईचारा बढ़ाने का संदेश देता है। यह हमें संयमित जीवन जीने और दूसरों के प्रति दयालु होने की प्रेरणा देता है। इस पाक महीने में की गई हर इबादत का सवाब (पुण्य) कई गुना बढ़ जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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