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फ़रवरी, 21, 2026
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ग्लोबल क्रूड ऑयल मार्केट में भारत का नया दांव: सऊदी अरब बना फिर से पसंदीदा सप्लायर?

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Crude Oil Market: वैश्विक तेल बाजार में एक बड़ा भू-राजनीतिक और व्यापारिक बदलाव सामने आ रहा है, जहां भारत, दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक, अपनी खरीद रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव कर रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत इस महीने सऊदी अरब से 1-1.1 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का आयात कर सकता है, जो 2019 के बाद सबसे अधिक आंकड़ा होगा। यह कदम यूक्रेन युद्ध के बाद रियायती रूसी तेल पर भारत की बढ़ती निर्भरता के बाद आया है, जब रूस भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था।

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ग्लोबल क्रूड ऑयल मार्केट में भारत का नया दांव: सऊदी अरब बना फिर से पसंदीदा सप्लायर?

यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर पश्चिमी प्रतिबंधों और रियायतों के चलते भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदना शुरू किया था। इस अवधि में रूस ने इराक और सऊदी अरब जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं को पीछे छोड़ते हुए भारत के लिए शीर्ष तेल निर्यातक का दर्जा हासिल कर लिया था। हालांकि, ऊर्जा विश्लेषिकी फर्म केपलर (Kpler) की रिपोर्ट बताती है कि यह समीकरण अब तेजी से बदल रहा है। अब रूस से भारत का आयात घटकर 800,000-1 मिलियन बैरल प्रति दिन तक आ सकता है, जबकि सऊदी अरब से खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। यह स्पष्ट रूप से एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देता है।

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बदलते क्रूड ऑयल मार्केट का भू-राजनीतिक आयाम

भारत के इस आयात पैटर्न में बदलाव के कई कारण हो सकते हैं। इनमें भू-राजनीतिक संतुलन, शिपिंग लागत में परिवर्तन, और आपूर्ति की विश्वसनीयता प्रमुख हैं। सऊदी अरब, जो पारंपरिक रूप से भारत का एक महत्वपूर्ण तेल आपूर्तिकर्ता रहा है, अब फिर से एक मजबूत स्थिति में आ रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह बदलाव न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजारों में भी महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव ला सकता है। तेल आयात के क्षेत्र में यह कदम भारत के विविध आपूर्तिकर्ता आधार को बनाए रखने की नीति का हिस्सा भी हो सकता है, ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचा जा सके।

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यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सऊदी अरब एक बार फिर भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन पाएगा। रूसी तेल पर छूट कम होने, लंबी शिपिंग दूरी, और भुगतान संबंधी चुनौतियों के कारण भारत के लिए सऊदी तेल एक आकर्षक विकल्प के रूप में उभर रहा है। इसके अलावा, भारत अपने रणनीतिक भंडार को मजबूत करने और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से खरीद पर विचार कर रहा है।

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भारत की ऊर्जा रणनीति और बाजार पर प्रभाव

भारत की यह नई खरीद नीति उसके ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों के अनुरूप है, जहां विविध स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। सऊदी अरब से बढ़ते आयात का मतलब है कि भारत न केवल अपनी आपूर्ति श्रृंखला को संतुलित कर रहा है, बल्कि मध्य-पूर्व के साथ अपने पारंपरिक ऊर्जा संबंधों को भी मजबूत कर रहा है। वैश्विक तेल खेल में यह बदलाव अन्य प्रमुख तेल आयातकों के लिए भी संकेत हो सकता है, जो अपनी खरीद रणनीतियों की समीक्षा कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और उपलब्धता पर भी इसका असर दिख सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह कदम भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए निरंतर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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