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फ़रवरी, 21, 2026
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होलिका दहन 2026: जानिए क्या जलाएं और क्या नहीं, धार्मिक नियमों का करें पालन

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Holika Dahan 2026
Holika Dahan 2026: फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन का पवित्र पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जिसमें भक्त प्रहलाद की भक्ति और भगवान विष्णु की कृपा का स्मरण किया जाता है। अग्नि में नकारात्मकता का नाश करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस पवित्र अग्नि में कुछ विशेष सामग्री ही अर्पित की जाती है, ताकि इसका संपूर्ण धार्मिक महत्व प्राप्त हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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होलिका दहन 2026: जानिए क्या जलाएं और क्या नहीं, धार्मिक नियमों का करें पालन

होलिका दहन के दिन पवित्र अग्नि में कुछ भी अनर्गल वस्तु अर्पित करने से बचना चाहिए। शास्त्रों में उन वस्तुओं का स्पष्ट उल्लेख है जिन्हें होलिका में डालना अशुभ माना जाता है और जो पूजा के शुभ फल को बाधित कर सकती हैं।

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Holika Dahan 2026: इन वस्तुओं को अग्नि में अर्पित करने से बचें

होलिका दहन की अग्नि अत्यंत पवित्र मानी जाती है, जिसमें केवल शुभ और प्राकृतिक वस्तुओं का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। प्लास्टिक, कांच, धातु जैसी वस्तुएं न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं बल्कि इनका आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व भी नहीं है। यह सामग्री अग्नि को दूषित करती है और पूजा के पवित्र उद्देश्य को भंग करती है। इसके बजाय, गोबर के उपले, सूखी लकड़ी, अनाज की बालियां, नारियल और अन्य प्राकृतिक सामग्री ही अर्पित करनी चाहिए। कूड़ा-कचरा या अनुपयोगी वस्तुएं डालना होलिका दहन के पवित्र अनुष्ठान का अपमान माना जाता है। इस दौरान, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सकता है और घर-परिवार में अशांति आ सकती है। होलिका दहन का मुख्य उद्देश्य नकारात्मकता का नाश और सकारात्मकता का स्वागत करना है, इसलिए इन नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।

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होलिका दहन के पावन अवसर पर भक्तगण अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और ग्रहों के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए विशेष उपाय करते हैं। इस दिन पवित्र अग्नि की परिक्रमा करना और उसमें अपनी पुरानी बुराइयों व नकारात्मक विचारों को भस्म करने का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद होलिका की राख को घर लाकर माथे पर लगाना शुभ माना जाता है। यह राख बुरी शक्तियों से रक्षा करती है और घर में सुख-समृद्धि लाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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**निष्कर्ष एवं उपाय**
होलिका दहन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और नवजीवन के स्वागत का प्रतीक है। इस दिन पूर्ण श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए पूजा करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इस पवित्र अवसर पर किसी भी प्रकार की नकारात्मक सामग्री को अग्नि में डालने से बचें और केवल धार्मिक रूप से मान्य वस्तुओं का ही प्रयोग करें ताकि आपको पूजा का संपूर्ण शुभ फल प्राप्त हो सके।

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