

Craft Village: कला की कूची से अब सिर्फ तस्वीरें नहीं, बल्कि कलाकारों की तकदीरें भी संवरेंगी। मधुबनी की ऐतिहासिक धरती जितवारपुर में बिहार के पहले शिल्पग्राम की नींव रखकर एक नया अध्याय लिख दिया गया है। वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार और बिहार संग्रहालय के संयुक्त प्रयास से यह अनुपम सौगात इस गांव को मिली है, जो अपनी कला परंपरा के लिए विश्वविख्यात है। शनिवार को कला-संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का कार्यारंभ किया, जिसके बाद से पूरे गांव में उत्सव का माहौल है।

क्या है Craft Village परियोजना और कैसे बदलेगी गांव की सूरत?
जितवारपुर को एक आदर्श शिल्पग्राम के रूप में विकसित करने की यह पूरी परियोजना केंद्र सरकार के नेशनल हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम का हिस्सा है। इस कार्य के लिए केंद्र सरकार द्वारा कुल 9 करोड़, 2 हजार 470 रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इस खर्च का 80% हिस्सा वस्त्र मंत्रालय वहन करेगा, जबकि शेष 20% राशि का योगदान बिहार संग्रहालय द्वारा किया जाएगा। बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को इस निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

परियोजना के पहले चरण में कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य किए जाएंगे। गांव के डाकबंगला के पास एक सर्वसुविधायुक्त गेस्ट हाउस बनाया जाएगा, जिसमें चार कमरे होंगे। इसके अलावा, स्थानीय कला को प्रदर्शित करने और बेचने के लिए 12 अलग-अलग स्टॉल तैयार किए जाएंगे, जहां मधुबनी पेंटिंग, पेपरमेशी, सुजनी कला और टेराकोटा जैसी कलाकृतियों को स्थान मिलेगा। गांव में प्रवेश के लिए एक भव्य द्वार का निर्माण होगा, जिसे बेहतरीन मिथिला कला से सजाया जाएगा।
पद्मश्री पुरस्कारों से सम्मानित कलाकारों का गढ़ है जितवारपुर
जितवारपुर गांव की ख्याति किसी से छिपी नहीं है। यह चार सौ घरों वाला देश का इकलौता गांव है, जिसने देश को सबसे ज्यादा पद्मश्री कलाकार दिए हैं। इस गांव की जगदम्बा देवी (1975), सीता देवी (1980) और बौआ देवी (2017) को पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। यदि निकटवर्ती लहेरियागंज को भी जोड़ लें तो शिवन पासवान और शांति देवी (2024) को मिलाकर यह संख्या 5 हो जाती है। इसके अलावा यहां 18 राष्ट्रीय और 50 से अधिक राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त कलाकार हैं।
गांव का लगभग हर घर एक कला कक्ष है और हर निवासी एक कलाकार। यहां के 90% लोग हस्तशिल्प पर ही आश्रित हैं। इस गांव ने मिथिला चित्रकला की तीनों प्रमुख शैलियों को सहेज कर रखा है। अब इस परियोजना के साकार होने से इन कलाकारों को अपनी कला का उचित मूल्य मिल सकेगा और बिचौलियों पर निर्भरता समाप्त होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
एक साल में पूरा होगा काम, ये सुविधाएं मिलेंगी
अधिकारियों ने इस परियोजना को एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है। निर्माण कार्यों में गांव के तीन सरकारी तालाबों का जीर्णोद्धार भी शामिल है, जिनके चारों ओर रंगीन पत्थरों से सजावट और वृक्षारोपण किया जाएगा। पूरे गांव में लगभग सौ स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी और सड़कों को पक्का किया जाएगा।
इस योजना की सबसे अनूठी बात यह है कि गांव के हर घर की बाहरी दीवार पर मधुबनी पेंटिंग उकेरी जाएगी। इसके लिए विभाग पहले सभी घरों की बाहरी दीवारों पर सफेद रंग से पुताई कराएगा, जिसके बाद घर में रहने वाले कलाकार स्वयं अपनी दीवारों को अपनी कला से सजाएंगे। इससे पूरा गांव एक जीवंत कला दीर्घा जैसा प्रतीत होगा।
कलाकारों और अधिकारियों ने जताई खुशी
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कला-संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि यह परियोजना जितवारपुर सहित पूरे मधुबनी के लिए एक वरदान साबित होगी। बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि 2019 से ही इसके लिए प्रयास किए जा रहे थे, जो अब जाकर सफल हुए हैं। बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक ने विश्वास दिलाया कि वे इस परियोजना को पूरी गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पद्मश्री बौआ देवी, दुलारी देवी और अन्य कलाकारों ने सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उनकी कला को नई पहचान और आर्थिक मजबूती मिलेगी।





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