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फ़रवरी, 22, 2026
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होम लोन: खरीदें अपना घर या किराए पर रहें? जानें क्या है फायदे का सौदा

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Home Loan: अपना आशियाना हर किसी का सपना होता है, लेकिन क्या मौजूदा बाजार में घर खरीदना वाकई फायदे का सौदा है या किराए पर रहना ज्यादा समझदारी है? भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में 1.25 प्रतिशत की कटौती के बाद होम लोन भले ही कुछ सस्ता हुआ है, लेकिन बड़े शहरों में संपत्ति की बढ़ती कीमतों ने इस पुरानी बहस को फिर से गरमा दिया है। एक तरफ होम लोन की लंबी ईएमआई की चुनौती है, तो दूसरी तरफ किराए पर रहने की अपनी सहूलियतें। आइए जानते हैं, इस जटिल समीकरण के हर पहलू को।

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होम लोन: खरीदें अपना घर या किराए पर रहें? जानें क्या है फायदे का सौदा

होम लोन के साथ घर खरीदने के फायदे

अपना खुद का घर होना सिर्फ एक छत नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण वित्तीय संपत्ति भी है। जब कोई व्यक्ति होम लोन के माध्यम से घर खरीदता है, तो वह आमतौर पर 15 से 20 साल की लंबी अवधि के लिए नियमित मासिक किस्त (EMI) का भुगतान करता है। इस पूरी प्रक्रिया में, न केवल घर अंततः आपका हो जाता है, बल्कि समय के साथ संपत्ति की कीमतें भी बढ़ती रहती हैं, जिससे यह एक बेहतरीन निवेश साबित होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह संपत्ति जरूरत पड़ने पर बेची जा सकती है या किराए पर देकर अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपना घर होने से न केवल रहने की स्वतंत्रता मिलती है, बल्कि आप अपनी पसंद के अनुसार उसमें बदलाव भी कर सकते हैं। हालांकि, इस सुविधा के साथ लंबी अवधि की ईएमआई चुकाने की प्रतिबद्धता भी जुड़ी होती है।

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किराए पर रहने के लाभ और लचीलापन

किराए के घर में रहने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि लंबी ईएमआई जैसी वित्तीय जिम्मेदारियों से मुक्ति मिल जाती है। इससे आपके मासिक बजट पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। इसके अलावा, प्रॉपर्टी के रखरखाव से जुड़ी सभी परेशानियां और खर्च आमतौर पर मकान मालिक के होते हैं, जिससे किराएदार को इस बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती। जिन पेशेवरों को अक्सर नौकरी के सिलसिले में शहर बदलने पड़ते हैं, उनके लिए किराए का घर एक लचीला और व्यावहारिक विकल्प है। हर नए शहर में घर खरीदना न केवल महंगा होता है, बल्कि एक बड़ी प्रतिबद्धता भी होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। किराए पर रहने से ट्रांसफर होने पर आसानी से नए स्थान पर घर मिल जाता है और होम लोन की चिंता भी नहीं रहती। किराए पर रहने से आप अपनी पूंजी को अन्य निवेशों में लगा सकते हैं, जो बेहतर रिटर्न दे सकते हैं। आखिर में, घर खरीदने या किराए पर रहने का फैसला आपकी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, करियर की प्रकृति, भविष्य की योजनाओं और जीवनशैली पर निर्भर करता है। दोनों ही विकल्पों के अपने फायदे और नुकसान हैं, और अंतिम निर्णय पूरी तरह से आप पर ही निर्भर करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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