

Bihar Cybercrime: डिजिटल दुनिया में जहां एक ओर सुविधाओं का अंबार है, वहीं दूसरी ओर अपराधियों ने ठगी के नए-नए जाल बुनने शुरू कर दिए हैं। अब ये जाल आम नागरिक की दहलीज लांघकर जनप्रतिनिधियों के द्वार तक पहुंच चुके हैं।
हालिया मामला बिहार के बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र से सामने आया है, जहां भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी (Mithilesh Tiwari) को साइबर अपराध का शिकार बनाया गया। शातिर ठगों ने विधायक के नाम पर फेसबुक पर एक फर्जी आईडी बनाई और उसके माध्यम से लोगों को चूना लगाया। बताया जा रहा है कि इस फर्जी आईडी का इस्तेमाल कर अपराधियों ने एक व्यक्ति से 25 हजार रुपये की धोखाधड़ी की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधायक के नाम पर हुई यह ऑनलाइन ठगी कई मायनों में चौंकाने वाली है।
Bihar Cybercrime: कैसे हुआ विधायक के नाम पर फर्जीवाड़ा?
मिली जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधियों ने बहुत ही चतुराई से विधायक मिथिलेश तिवारी की वास्तविक फेसबुक प्रोफाइल से तस्वीरें और अन्य विवरण चुराए। इसके बाद, उन्होंने एक नई प्रोफाइल बनाई जो बिल्कुल असली जैसी दिखती थी। इस फर्जी आईडी का उपयोग कर ठगों ने विधायक के जानने वालों और उनके समर्थकों से पैसे मांगने शुरू कर दिए। एक व्यक्ति ने मदद के नाम पर 25 हजार रुपये भी ट्रांसफर कर दिए, जिसके बाद उसे धोखाधड़ी का एहसास हुआ। ऐसी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि साइबर अपराधी अब कितने शातिर और निडर हो गए हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
विधायक मिथिलेश तिवारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया है और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह महज एक व्यक्तिगत घटना नहीं, बल्कि एक व्यापक समस्या का प्रतीक है जो पूरे समाज को अपनी गिरफ्त में ले रही है।
बढ़ते साइबर अपराध और जागरूकता की आवश्यकता
बिहार में साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। आम लोगों के साथ-साथ अब प्रमुख हस्तियों को भी ऑनलाइन ठगी का निशाना बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अपराधों से बचने के लिए डिजिटल साक्षरता और जागरूकता बेहद जरूरी है। लोगों को किसी भी सोशल मीडिया प्रोफाइल से आने वाले संदिग्ध संदेशों या पैसे मांगने वाले अनुरोधों पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए। हमेशा संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क कर पुष्टि करनी चाहिए। इसके अलावा, अपनी निजी जानकारी और वित्तीय विवरण ऑनलाइन साझा करने से बचना चाहिए। पुलिस प्रशासन भी इन मामलों पर लगाम लगाने के लिए अपनी ओर से प्रयास कर रहा है, लेकिन नागरिकों की सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

