

Mukul Roy Death: राजनीति के बिसात पर हर चाल को बारीकी से समझने वाला, कभी ममता बनर्जी का दायां हाथ रहा एक कद्दावर चेहरा आज अनंत यात्रा पर निकल गया। भारतीय राजनीति का एक अध्याय कोलकाता के अपोलो अस्पताल में समाप्त हो गया, जब पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय ने 71 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली।
Mukul Roy Death: पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय का 71 साल की उम्र में निधन, राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर
Mukul Roy Death: एक अनुभवी राजनेता का अंतिम सफर
सोमवार तड़के भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। वे 71 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि रात लगभग 1:30 बजे हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) से उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले दो-तीन वर्षों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे रॉय सक्रिय राजनीति से लगभग दूर हो गए थे। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली दूसरी यूपीए सरकार में उन्होंने शिपिंग और बाद में रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मुकुल रॉय के निधन पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने उन्हें एक अनुभवी नेता बताया। घोष ने कहा, “वह एक अनुभवी भारतीय राजनेता थे। केंद्रीय मंत्री भी बने। जब वह भाजपा में आए, तो उन्हें बहुत सम्मान मिला। 2019 से 2021 तक, वह हमारे साथ थे। बाद में, उन्होंने भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था।” घोष ने आगे कहा कि पिछले दो-तीन सालों से वे बीमार थे और सक्रिय राजनीति में हिस्सा नहीं ले पा रहे थे। उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी रॉय के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “वरिष्ठ राजनेता श्री मुकुल रॉय के दुखद निधन के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ। उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति मिले।”
राजनीतिक सफर: कांग्रेस से टीएमसी और कानूनी चुनौतियां
मुकुल रॉय ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी, लेकिन बाद में वे ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक बन गए और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार में उन्होंने जहाजरानी मंत्रालय में राज्य मंत्री और बाद में रेल मंत्री के रूप में देश की सेवा की। उन्हें एक कुशल संगठनकर्ता और चुनावी रणनीतिकार माना जाता था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। मई 2021 में भाजपा विधायक चुने जाने के बावजूद, कथित तौर पर अगस्त 2021 में विधानसभा चुनावों के बाद वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की उपस्थिति में तृणमूल कांग्रेस में फिर से शामिल हो गए थे। यह घटना Mukul Roy Death से पहले उनकी राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव थी।
टीएमसी में शामिल होने के बाद रॉय राज्य विधानसभा की सदस्यता से अपनी अयोग्यता को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें रॉय को राज्य विधानसभा से अयोग्य ठहराया गया था। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में खूब सुर्खियां बटोरी थीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय की ओर से पेश वकील प्रतीका द्विवेदी ने तर्क दिया था कि स्पीकर ने अयोग्यता याचिकाओं को इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि अयोग्यता को साबित करने के लिए उपयोग किए गए सोशल मीडिया पोस्ट साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत प्रमाणित नहीं थे। उन्होंने आगे कहा कि हाई कोर्ट ने इस निष्कर्ष को यह कहते हुए पलट दिया था कि दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई में धारा 65बी का सख्ती से पालन करना आवश्यक नहीं है। शुभेंदु अधिकारी और अंबिका रॉय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गौरव अग्रवाल ने दलील दी कि मुकुल रॉय ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और बाद में खुले तौर पर दूसरी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए, जिससे स्पष्ट रूप से अयोग्यता के लिए रास्ता बन गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने रॉय को अंतरिम राहत दी और उन्हें विधायक के तौर पर अयोग्य ठहराने वाले हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। यह प्रकरण एक अनुभवी भारतीय राजनेता के तौर पर उनकी कानूनी समझ को भी दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



