

राहुल गांधी लीडरशिप: कभी-कभी एक मजबूत दीवार भी अपने भीतर की दरारों से घिर जाती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के हालिया बयान ऐसे ही एक संकेत हैं, जिन्होंने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
राहुल गांधी लीडरशिप पर मणिशंकर अय्यर का तीखा वार: क्या INDIA ब्लॉक को चाहिए नया सेनापति?
राहुल गांधी लीडरशिप: कभी-कभी एक मजबूत दीवार भी अपने भीतर की दरारों से घिर जाती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के हालिया बयान ऐसे ही एक संकेत हैं, जिन्होंने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने राहुल गांधी को INDIA ब्लॉक के नेता पद से इस्तीफा देने का आग्रह किया है, जिससे विपक्षी खेमे में नेतृत्व को लेकर नई बहस छिड़ गई है। अय्यर ने इस भूमिका के लिए ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, एम.के. स्टालिन और तेजस्वी यादव सहित कई प्रमुख विपक्षी नेताओं के नाम सुझाए हैं।
हालिया चुनावी नतीजों में कांग्रेस को मिली हार का जिक्र करते हुए अय्यर ने तर्क दिया कि ये क्षेत्रीय नेता गठबंधन को मजबूत करने और उसे सुदृढ़ बनाने के लिए अधिक समय दे सकते हैं। उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर और INDIA ब्लॉक के साझेदारों के बीच मंथन की एक नई कड़ी छेड़ दी है।
INDIA ब्लॉक में राहुल गांधी लीडरशिप पर उठे सवाल
मणिशंकर अय्यर ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस इतनी अक्षम साबित हुई कि हमने ममता बनर्जी को खुद से दूर कर दिया, और इसी वजह से पार्टी कमजोर होती चली गई। उन्होंने उम्मीद जताई कि राहुल गांधी इस महत्वपूर्ण INDIA ब्लॉक नेतृत्व पद को अपने पास रखने की कोशिश करने के बजाय क्षेत्रीय पार्टी के नेताओं को कमान संभालने देंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अय्यर के अनुसार, चाहे वह स्टालिन हों, ममता दीदी हों, अखिलेश हों, तेजस्वी हों या कोई अन्य क्षेत्रीय नेता, वे शायद गठबंधन को अधिक समय दे पाएंगे और उसे एक नई दिशा दे सकते हैं।
अय्यर के इस बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने अपनी पार्टी का बचाव किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि केवल राहुल गांधी ही INDIA ब्लॉक का प्रभावी नेतृत्व कर सकते हैं। मसूद ने जोर देकर कहा कि भाजपा को कड़ी टक्कर देने की क्षमता केवल राहुल गांधी में ही है, जो उनके नेतृत्व को अनिवार्य बनाती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
अय्यर के आलोचनात्मक बयानों का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस पार्टी या उसके नेतृत्व के प्रति आलोचनात्मक रुख अपनाया है। इससे पहले भी उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन की जमकर तारीफ करते हुए कहा था कि वे मुख्यमंत्री के रूप में अपनी भूमिका बनाए रखने के लिए पूरी तरह से योग्य हैं। उनकी ये टिप्पणियां उस समय आई थीं जब कांग्रेस राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी थी। अय्यर ने ये टिप्पणी ‘विजन 2031: विकास और लोकतंत्र’ नामक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में की थी, जिसका उद्घाटन स्वयं मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने किया था।
उस अवसर पर, उन्होंने विजयन की प्रशंसा करते हुए सुझाव दिया था कि केरल में पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य के कानूनों में संशोधन किया जाना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री की उपस्थिति में, जिन पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे अगले मुख्यमंत्री होंगे, मैं एक बार फिर अपनी अपील दोहराता हूं कि केरल को देश का सर्वश्रेष्ठ पंचायती राज राज्य बनाने के लिए, व्यावहारिक अनुभव, थॉमस आइज़ैक के विचारों, मेरी अध्यक्षता में तैयार की गई पांच खंडों वाली रिपोर्ट और वी.के. रामचंद्रन द्वारा जिला नियोजन पर योजना आयोग द्वारा प्रसारित नोट के आधार पर राज्य कानूनों में संशोधन किया जाना चाहिए, जब आयोग ने वास्तव में पंचायती राज का समर्थन किया था। इस तरह के बयान अक्सर कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा करते रहे हैं, लेकिन अय्यर अपने विचारों को खुलकर व्यक्त करने से कभी नहीं हिचकिचाते।

