

Bihar News: कानून का जाल कभी-कभी अपनों को भी उलझा लेता है, जब एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में किसी अधिकारी को गिरफ्तार करने पहुंचे तो नजारा वाकई दिलचस्प हो जाता है। बिहार में अग्नि सेवा विभाग के महानिरीक्षक (आईजी) पद पर तैनात 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी सुनील नायक के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जब आंध्र प्रदेश पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पटना पहुंच गई।
Bihar News: क्या है IPS सुनील नायक से जुड़ा पूरा मामला?
बिहार कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुनील नायक उस समय सुर्खियों में आ गए जब आंध्र प्रदेश पुलिस की एक टीम उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पटना पहुंची। नायक वर्तमान में बिहार में फायर ब्रिगेड के आईजी के पद पर कार्यरत हैं। यह घटना तब हुई जब आंध्र प्रदेश पुलिस ने एक विशेष मामले में उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की, लेकिन पटना सिविल कोर्ट से उन्हें बड़ी राहत मिली। इस घटना ने दो राज्यों के पुलिस बलों के बीच उत्पन्न होने वाले कानूनी और प्रशासनिक जटिलताओं को उजागर किया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर आंध्र पुलिस को बिहार आकर एक आईपीएस अधिकारी को क्यों गिरफ्तार करना पड़ रहा था। यह एक ऐसा मामला है जो पुलिस और न्यायपालिका के बीच की पेचीदगियों को दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सूत्रों के मुताबिक, सुनील नायक को एक पुराने मामले में आंध्र प्रदेश में दर्ज मुकदमे के सिलसिले में तलाश किया जा रहा था। आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम ने पटना पहुंचकर स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया और नायक को गिरफ्तार करने की अपनी मंशा जताई। हालांकि, नायक ने इस पर कानूनी कार्रवाई की और गिरफ्तारी से बचने के लिए पटना सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और अधिकारी के पद को देखते हुए उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की, जिससे आंध्र पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। यह पूरी न्यायिक प्रक्रिया कई सवाल खड़े करती है कि आखिर मामला कितना गंभीर था कि दूसरे राज्य की पुलिस को इतना लंबा सफर तय करना पड़ा।
यह घटना बिहार के पुलिस महकमे में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। एक आईपीएस अधिकारी का इस तरह से किसी दूसरे राज्य की पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का प्रयास निश्चित तौर पर गंभीर मामला है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पटना सिविल कोर्ट से मिली राहत: कानूनी दांवपेच
पटना सिविल कोर्ट ने सुनील नायक को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करते हुए मामले की अगली सुनवाई तक के लिए राहत दी है। इस फैसले ने आंध्र प्रदेश पुलिस के तात्कालिक प्रयासों पर विराम लगा दिया है। कोर्ट के इस निर्णय से नायक को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और कानूनी रूप से बचाव करने का अवसर मिल गया है। इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया में अब आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। यह पूरा प्रकरण भारत में संघीय ढांचे के भीतर पुलिस और न्यायपालिका के संबंधों की जटिलताओं को दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अधिकारी को इस कानूनी उलझन से निकलने के लिए अभी और समय मिल गया है, और उम्मीद है कि आने वाले समय में इस मामले से जुड़ी सभी सच्चाई सामने आ जाएगी। यह मामला सिर्फ एक आईपीएस अधिकारी की गिरफ्तारी का प्रयास नहीं, बल्कि राज्यों के बीच कानूनी समन्वय और अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को भी दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




