

Bhiwadi Factory Blast: जीवन की लौ पलक झपकते ही बुझ गई, उम्मीदों के दीये एक झटके में बुझ गए। राजस्थान के भिवाड़ी में हुई एक भीषण दुर्घटना ने फिर साबित कर दिया कि लापरवाही की कीमत अक्सर बेगुनाह जिंदगियों को चुकानी पड़ती है।
भिवाड़ी फैक्ट्री ब्लास्ट: राजस्थान के भिवाड़ी में बारूद का तांडव, मरने वालों का आंकड़ा बढ़ा, लापरवाहियों पर उठे सवाल
भिवाड़ी फैक्ट्री ब्लास्ट: कैसे एक चिंगारी ने मचाया हाहाकार?
राजस्थान के औद्योगिक शहर भिवाड़ी के खुशखेड़ा इलाके में 16 फरवरी 2026 को एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भयावह विस्फोट ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। यह हादसा इतना भीषण था कि शुरुआती घंटों में ही सात मजदूर जिंदा जल गए। आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि उन्हें बुझाने में घंटों मशक्कत करनी पड़ी। इस घटना ने एक बार फिर कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों और सरकारी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की लापरवाही और नियमों की अनदेखी का जीता-जागता उदाहरण है। जिस अवैध पटाखा फैक्ट्री में यह त्रासदी हुई, वहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। आस-पास के गरीब मजदूर परिवार, रोजी-रोटी की तलाश में, अपनी जान जोखिम में डालकर यहां काम करने को मजबूर थे। एक छोटी सी चिंगारी ने न केवल फैक्ट्री को राख कर दिया, बल्कि कई परिवारों की खुशियों को भी हमेशा के लिए बुझा दिया।
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।, मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। गंभीर रूप से घायल कई मजदूर अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं, जिससे मृतकों की संख्या में और वृद्धि होने की आशंका है। हर गुजरते दिन के साथ, त्रासदी की भयावहता और पीड़ितों का दर्द गहराता जा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
जांच और मुआवजे की मांग तेज
इस त्रासदी के बाद स्थानीय प्रशासन और सरकार पर चौतरफा दबाव बन रहा है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। पीड़ितों के परिवारों को तत्काल और पर्याप्त मुआवजा देने की भी पुरजोर मांग की जा रही है। यह केवल एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उन परिवारों के प्रति संवेदना और जिम्मेदारी का निर्वहन है, जिन्होंने अपने कमाने वाले सदस्य को खो दिया।
प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और फैक्ट्री मालिक के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।, हालांकि, सवाल यह है कि ऐसी अवैध फैक्ट्रियां लंबे समय से कैसे चल रही थीं और स्थानीय अधिकारियों की इस पर नजर क्यों नहीं पड़ी। यह घटना पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि औद्योगिक सुरक्षा और मानवीय मूल्यों को कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस भीषण त्रासदी ने भिवाड़ी को गहरे सदमे में डाल दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।, उन गरीब मजदूरों की चीखें आज भी हवा में गूंज रही होंगी, जो बेहतर जिंदगी की तलाश में काल के गाल में समा गए। यह वक्त है कि हम इससे सबक लें और सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



