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फ़रवरी, 23, 2026
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Patna News: आईपीएस सुनील नायक को पटना सिविल कोर्ट से बड़ी राहत, आंध्र प्रदेश पुलिस की अर्जी ख़ारिज

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Patna News: कभी-कभी न्याय की चौखट पर, कानून के दांव-पेंच ऐसे उलझते हैं कि बड़े-बड़ों को भी राहत की सांस मिल जाती है। ऐसा ही कुछ हुआ बिहार में तैनात एक आईपीएस अधिकारी के साथ। पटना सिविल कोर्ट ने बिहार में पदस्थापित आईपीएस एम. सुनील नायक को बड़ी राहत देते हुए आंध्र प्रदेश पुलिस की ट्रांजिट रिमांड अर्जी को खारिज कर दिया। यह निर्णय आंध्र प्रदेश पुलिस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जो बिना पुख्ता दस्तावेज़ों के एक आईपीएस अधिकारी को गिरफ्तार करने बिहार पहुंची थी।

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मामला तब प्रकाश में आया जब आंध्र प्रदेश पुलिस एक मामले में आईपीएस एम. सुनील नायक को गिरफ्तार करने के लिए पटना पहुंची। गिरफ्तारी के बाद, उन्होंने पटना सिविल कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की, ताकि नायक को आंध्र प्रदेश ले जाया जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, कोर्ट ने इस अर्जी पर सुनवाई के दौरान कई गंभीर आपत्तियां उठाईं।

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Patna News: कानूनी दांवपेंच का असर

सिविल कोर्ट ने पाया कि आंध्र प्रदेश पुलिस के पास न तो एम. सुनील नायक की गिरफ्तारी के लिए वैध वारंट था और न ही केस डायरी को अपडेट किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना किसी भी अधिकारी को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायाधीश ने आंध्र प्रदेश पुलिस के इस रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की, जिसमें मूलभूत कानूनी आवश्यकताओं की अनदेखी की गई थी।

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यह भी पढ़ें:  Bihar Census: बिहार की तकदीर गढ़ेगी डिजिटल जनगणना 2027, 17 अप्रैल से शुरू होगी स्व-गणना

आईपीएस एम. सुनील नायक के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि आंध्र प्रदेश पुलिस ने आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया है और बिना वारंट के गिरफ्तारी अवैध है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘ट्रांजिट रिमांड’ एक गंभीर न्यायिक प्रक्रिया है, जिसके लिए पुख्ता सबूत और वैध दस्तावेज़ों का होना अनिवार्य है। इस फैसले के बाद आईपीएस एम. सुनील नायक को तत्काल प्रभाव से राहत मिल गई है। यह घटना दर्शाती है कि कानून का राज कितना महत्वपूर्ण है और प्रक्रियात्मक त्रुटियों को अदालतें कितनी गंभीरता से लेती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

न्यायिक प्रणाली पर बढ़ा भरोसा

पटना सिविल कोर्ट के इस निर्णय से न्यायिक प्रणाली में लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो, उसे बिना वैध कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में नहीं लिया जा सकता। आंध्र प्रदेश पुलिस को अब नए सिरे से कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा यदि वे एम. सुनील नायक के खिलाफ आगे बढ़ना चाहते हैं। यह कदम कानून के शासन को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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