

Tej Pratap Yadav Divorce: बिहार की सियासत में जब रिश्तों की डोर उलझती है, तो कई बार वह सिर्फ निजी नहीं रह जाती, बल्कि सार्वजनिक चर्चा का विषय बन जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा बिहार के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के भीतर चल रहे निजी विवाद में दिख रहा है।
Tej Pratap Yadav Divorce: आज फिर मध्यस्थता का प्रयास
बिहार की राजनीति में हमेशा चर्चा में रहने वाले लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय के बीच चल रहे तलाक मामले में आज पटना फैमिली कोर्ट में एक बार फिर मध्यस्थता का प्रयास किया जाएगा। यह तीसरी बार है जब अदालत सुलह की कोशिश कर रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनवाई ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हो रही है, जब पहले हुई सुनवाई में सुलह की सभी संभावनाएं लगभग समाप्त हो चुकी थीं। इस पारिवारिक विवाद ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में खूब सुर्खियां बटोरी हैं, क्योंकि इसमें दो प्रमुख राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
पिछले घटनाक्रमों पर गौर करें तो, पटना फैमिली कोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार की अदालत ने पिछले साल 3 दिसंबर को इस मामले की सुनवाई की थी। उस समय कोर्ट ने दोनों पक्षों को एक बार फिर मध्यस्थता केंद्र में भेजकर सुलह का आखिरी मौका देने का फैसला किया था। अदालत का मानना था कि शायद मध्यस्थता के जरिए कोई रास्ता निकल सके। हालांकि, ऐश्वर्या राय के वकील ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे सुलह के मूड में नहीं हैं।
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न्यायिक प्रक्रिया और मध्यस्थता की चुनौती
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब तेज प्रताप यादव ने अपनी शादी के कुछ ही महीनों बाद तलाक की अर्जी दाखिल कर दी थी। उनका कहना था कि उनकी शादी घरवालों की मर्जी से हुई थी और वे ऐश्वर्या के साथ नहीं रहना चाहते। इसके बाद से ही यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। ऐश्वर्या राय, जो राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता चंद्रिका राय की बेटी हैं, ने भी तेज प्रताप और उनके परिवार के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पारिवारिक विवाद ने राजद के अंदरूनी मामलों में भी हलचल पैदा की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अदालत के लिए यह एक संवेदनशील मामला है क्योंकि इसमें एक तरफ दो युवा हैं और दूसरी तरफ दो बड़े राजनीतिक घराने। मध्यस्थता का उद्देश्य हमेशा विवादों को कोर्ट के बाहर सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाना होता है, लेकिन इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से कड़ा रुख देखने को मिला है। अब देखना यह होगा कि आज की मध्यस्थता क्या किसी नए मोड़ पर पहुंचती है या फिर मामला कानूनी लड़ाई के रास्ते पर ही आगे बढ़ता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस सुनवाई पर केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।




