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फ़रवरी, 24, 2026
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Kashmir Terrorism: किश्तवाड़ में सेना का ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ सफल, जांबाज डॉग टॉयसन ने बदल दी तस्वीर!

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Kashmir Terrorism: जब सरहद के प्रहरी अपनी जान की बाजी लगाकर देश की रक्षा में खड़े हों, तो हर चुनौती छोटी लगने लगती है। बर्फीली चोटियों से लेकर दुर्गम जंगलों तक, दुश्मनों की हर चाल को नाकाम करने का जज्बा ही हमारी सेना की पहचान है। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छतरू बेल्ट में चलाए गए बहुस्तरीय आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ ने भारतीय सेना और सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता दिलाई है। इस अभियान की सबसे प्रेरणादायक गाथा जांबाज डॉग टॉयसन की है, जिसने अपने पैर में गोली लगने के बावजूद अद्भुत साहस दिखाते हुए आतंकियों के ठिकाने तक सबसे पहले पहुंचकर सुरक्षा बलों को निर्णायक बढ़त प्रदान की।

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सूत्रों के अनुसार, टॉयसन एक स्थानीय कुत्ता है जिसे भारतीय सेना ने विशेष रूप से आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित किया है। छतरू के कठिन और पथरीले इलाके में पहाड़ों के बीच स्थित एक गुप्त ठिकाने में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिलने पर टॉयसन को आगे भेजा गया। सेना का यह मूक योद्धा दुर्गम चट्टानी ढलानों को पार करता हुआ रेंगते हुए ठिकाने तक पहुंचा। जैसे ही उसकी आहट मिली, आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें टॉयसन के पैर में गोली लग गई।

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गोली लगने के बावजूद टॉयसन अपने मिशन से पीछे नहीं हटा। वह सबसे पहले ढोक (अस्थायी ठिकाना) के पास पहुंचा और उसके इस असाधारण साहस ने सुरक्षा बलों को आतंकियों के ठिकाने तक सुरक्षित पहुंचने में सहायता की। इसके बाद सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन खूंखार आतंकियों को मार गिराया। घायल टॉयसन को बाद में तुरंत हवाई मार्ग से उपचार के लिए ले जाया गया। वर्तमान में वह उधमपुर में है और अधिकारियों के अनुसार उसकी हालत स्थिर है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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कश्मीर टेररिज्म: ऑपरेशन त्राशी-1 की अद्भुत कहानी

यह पूरा अभियान ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ के नाम से जाना गया, जिसे एक विशाल और बहु-एजेंसी आतंकवाद विरोधी अभियान बताया गया है। इसमें सेना की काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स डेल्टा, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त भागीदारी रही। अधिकारियों के मुताबिक, यह अभियान कई महीनों की गहन योजना और समन्वित रणनीति का परिणाम था।

जम्मू में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में जम्मू के आईजीपी बीएस टूटी ने बताया कि इस अभियान की पृष्ठभूमि वर्ष 2024 में बनी, जब ‘इजरायल ग्रुप’ नामक आतंकी संगठन के सात कट्टर आतंकी भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर आए थे। डेढ़ वर्ष की अवधि में इन आतंकियों के साथ 17 बार मुठभेड़ हुई। अप्रैल 2025 में इनमें से तीन आतंकी मारे गए थे।

आईजीपी टूटी ने स्पष्ट किया कि हालिया कार्रवाई इस लंबे अभियान का निर्णायक चरण थी, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर सैफुल्ला को मार गिराया गया। उन्होंने बताया कि किश्तवाड़ में आतंकियों के नेतृत्व को समाप्त कर दिया गया है, हालांकि उनके सहयोगी अन्य क्षेत्रों में अभी भी सक्रिय हो सकते हैं। अनुमान है कि जम्मू क्षेत्र में लगभग 20 विदेशी आतंकी सक्रिय हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

रणनीति और समन्वय का बेजोड़ उदाहरण

वहीं, काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स डेल्टा के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल एपीएस बल ने ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ को धैर्य, स्पष्ट सोच और हर स्तर पर निर्बाध समन्वय का आदर्श उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस आतंकवाद विरोधी अभियान में जमीन पर तैनात जवानों से लेकर कोर कमांडर, एडीजी, आईजी और डीजीपी तथा आर्मी कमांडर तक सभी स्तरों पर बेहतरीन तालमेल देखने को मिला।

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उपलब्ध सभी संसाधनों का संयुक्त और एकीकृत तरीके से उपयोग किया गया, जिसमें एक प्रशिक्षित डॉग से लेकर आधुनिक ड्रोन तक शामिल रहे। मेजर जनरल एपीएस बल ने बताया कि यह अभियान 14 जनवरी को किश्तवाड़ में शुरू हुआ और 18 जनवरी को पहली बार आतंकियों के ठिकाने का पता चला। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

इसके बाद 22 जनवरी, 25 जनवरी, 31 जनवरी, 4 फरवरी और 8 फरवरी को भी अलग-अलग मुठभेड़ हुई। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जवानों को बर्फबारी, बारिश और भूस्खलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जवानों की थकान कम करने के लिए उनकी नियमित अदला-बदली की गई। कुछ दलों को हेलीकाप्टर से उतारा गया, जबकि कुछ ने 6 से 8 घंटे की पैदल चढ़ाई कर इलाके में प्रवेश किया।

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उन्होंने बताया कि 4 फरवरी को कमांडर के सहयोगी आदिल के मारे जाने से अभियान को पहली महत्वपूर्ण सफलता मिली। 21 फरवरी को किश्तवाड़ के एसएसपी से मिली एक महत्वपूर्ण सूचना को 9 सेक्टर के ब्रिगेडियर तक पहुंचाया गया और कई एजेंसियों से इसकी पुष्टि की गई। इसके बाद दुर्गम पहाड़ों में संयुक्त अभियान चलाया गया।

विशेष बलों सहित अतिरिक्त टुकड़ियां तुरंत तैनात की गईं। आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सेना ने रियल टाइम निगरानी ड्रोन और नाइट विजन उपकरणों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया।

जांबाज टॉयसन का अदम्य साहस

मेजर जनरल बल ने कहा कि इस पूरे अभियान में सेना को कोई मानवीय क्षति नहीं हुई, सिवाय बहादुर टॉयसन के घायल होने के। तलाशी अभियान के दौरान अब तक तीन एके 47 राइफल सहित युद्ध जैसे साजो-सामान और मारे गए आतंकियों के शव बरामद किए गए हैं। ऑपरेशन त्राशी-1 ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सुरक्षा बल आतंकवाद के खिलाफ पूरी तैयारी, रणनीति और साहस के साथ डटे हैं और इस बार जीत की कहानी में एक मूक लेकिन साहसी योद्धा टॉयसन का नाम भी स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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