

Bhagalpur News: आवाज़ की दुनिया का एक सितारा अब हमेशा के लिए खामोश हो गया है, लेकिन उसकी गूंज फिजाओं में हमेशा ज़िंदा रहेगी। आकाशवाणी भागलपुर की प्रतिष्ठित आवाज और ‘हेलो फरमाइश’ कार्यक्रम से घर-घर में पहचान बनाने वाले डॉ. विजय कुमार मिश्रा, जिन्हें पूरा अंग प्रदेश ‘बिरजू भैया’ के नाम से जानता था, अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
पीपल के पत्ते पर उकेरी ‘अमर आवाज’ की तस्वीर
बिरजू भैया की सशक्त, नूरानी और आत्मीय आवाज को श्रद्धांजलि देने के लिए हर कोई उन्हें अपने शब्दों में याद कर रहा है। इसी कड़ी में, भारत के विश्वविख्यात लीफ आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने भी अपनी कला के माध्यम से उन्हें एक अद्वितीय श्रद्धांजलि अर्पित की है। मधुरेंद्र ने पांच घंटे के अथक परिश्रम के बाद पीपल के एक हरे पत्ते पर अत्यंत बारीकी से डॉ. विजय कुमार मिश्रा का चित्र उकेरा। इस कलाकृति पर उन्होंने लिखा, “हेलो फरमाइश, अलविदा बिरजू भैया।” यह कलाकृति उस आवाज को एक कलाकार का सलाम है, जिसने दशकों तक लोगों के दिलों पर राज किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Bhagalpur News: जब पहली बार हुआ कला और आवाज का संगम
इस अनोखी श्रद्धांजलि के पीछे की कहानी साझा करते हुए सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने अपने एक पुराने संस्मरण को याद किया। उन्होंने बताया, “मुझे वह दिन आज भी याद है, जब मैं कुछ वर्ष पहले भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में आयोजित अंगिका महोत्सव में पहुंचा था।” वहीं मुक्ताकाश मंच से जब बिरजू भैया ने बोलना शुरू किया, तो उनकी आवाज सुनकर मधुरेंद्र चौंक गए। यह वही आवाज थी जिसे वह बचपन से रेडियो पर सुनते आए थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वह पल उनके लिए अविस्मरणीय बन गया जब उन्हें बिरजू भैया से मिलने और बात करने का अवसर मिला। मधुरेंद्र बताते हैं कि बिरजू भैया ने उनकी कला की बहुत प्रशंसा की थी और उनकी आवाज में जो अपनापन, स्नेह और मिठास थी, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अंग प्रदेश की माटी में हमेशा गूंजेगी बिरजू भैया की आवाज
डॉ. विजय कुमार मिश्रा, जो बिरजू भैया के नाम से लोकप्रिय थे, ने अपनी विशिष्ट उद्घोषणा शैली, मधुर वाणी और अंगिका भाषा की आत्मीय अभिव्यक्ति से हर किसी के दिल में एक खास जगह बनाई थी। उनका लोकप्रिय कार्यक्रम “हेलो फरमाइश” सिर्फ एक रेडियो शो नहीं, बल्कि लाखों श्रोताओं के दिलों की धड़कन था। उनकी आवाज सिर्फ एक प्रसारण नहीं, बल्कि अंग प्रदेश की संस्कृति और भावनाओं की जीवंत प्रस्तुति थी। आज भले ही बिरजू भैया हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी अमर आवाज और स्मृतियां अंग प्रदेश की माटी में सदैव जीवित रहेंगी। इस अमूल्य धरोहर के खोने से अंग समाज ने अपनी पहचान का एक बड़ा हिस्सा खो दिया है।


