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फ़रवरी, 24, 2026
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Bokaro Elephant Attack: बोकारो में टलेगा बड़ा खतरा, हाथियों के Elephant Attack से बचाने के लिए प्रशासन ने बनाया WhatsApp ग्रुप

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Elephant Attack: झारखंड के बोकारो में हाथियों का झुंड जब आबादी वाले इलाकों का रुख करता है, तो दिलों की धड़कनें बढ़ जाती हैं। इसी खौफ को खत्म करने और जन-धन की हानि को रोकने के लिए अब जिला प्रशासन एवं वन विभाग ने मिलकर तकनीक का ‘महामंत्र’ अपनाया है।

बोकारो जिला प्रशासन ने हाथियों की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने और इसकी सूचना आम लोगों तक तुरंत पहुंचाने के लिए एक अनूठी पहल की है। अब एक व्हाट्सएप चैनल के माध्यम से लोगों को हाथियों के विचरण की ताजा जानकारी, उनकी लोकेशन और मूवमेंट का रियल-टाइम अपडेट मिलेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों को समय रहते सतर्क करना है ताकि वे हाथियों के रास्ते में आने से बच सकें।

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क्या है प्रशासन का ‘व्हाट्सएप कवच’?

यह व्हाट्सएप चैनल एक तरह से लोगों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा। वन विभाग की टीम जैसे ही किसी क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी दर्ज करेगी, तुरंत चैनल पर अपडेट साझा कर दिया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसमें न केवल हाथियों की लोकेशन होगी, बल्कि लोगों के लिए सुरक्षा निर्देश भी शामिल होंगे, जैसे कि हाथियों को न छेड़ें, उनके पास जाने की कोशिश न करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें। प्रशासन ने सभी प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों से इस चैनल से जुड़ने की अपील की है।

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इस व्यवस्था के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी नागरिक गलत सूचना या अफवाहों का शिकार न हो। अक्सर गलत जानकारी के कारण लोगों में दहशत फैल जाती है। आधिकारिक चैनल होने से अब लोगों को केवल सत्यापित और सटीक जानकारी ही मिलेगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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Elephant Attack रोकने में कैसे मिलेगी मदद?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। जब लोगों को पहले से पता होगा कि हाथियों का झुंड किस दिशा में बढ़ रहा है, तो वे स्वतः ही सतर्क हो जाएंगे और उस रास्ते का प्रयोग करने से बचेंगे। इससे इंसानों और हाथियों का आमना-सामना होने की घटनाएं कम होंगी। प्रशासन ने यह भी आग्रह किया है कि किसी भी आपात स्थिति में लोग तुरंत वन विभाग को सूचित करें ताकि समय पर मदद पहुंचाई जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पहल विशेषकर बोकारो जिले के उन ग्रामीण और जंगली इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां हाथियों की आवाजाही सबसे ज्यादा होती है।

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