
कंचन किशोर मिश्र, नई दिल्ली देशज टाइम्स ब्यूरो। सोमवार दो दिसंबर का दिन करोड़ों मिथिलांचलवासियों के लिए खुशियों का सौगात लेकर आई। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से मैथिली भाषा को संविधान की अष्ठम सूची में शामिल किए जाने के बाद मिथिलांचलवासियों की अभिलाषा थी कि मैथिली को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में सम्मिलित भाषाओं के पाठ्यक्रम की सूची में चयनित किया जाए। आखिरकार वो स्वप्न भी पूरा हुआ और भाषा के रूप में मैथिली अपनी समृद्धि की ओर एक कदम और आगे बढ़ गई।

जब सांसद सी पी ठाकुर मिले केंद्रीय मानव संसाधन व विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मौका था19 जुलाई को राज्यसभा सांसद सीपी ठाकुर के नेतृत्व में शिष्टमंडल के उनसे मिलने का जब केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मिलकर मैथिली भाषा

को केंद्रीय माध्यमिक बोर्ड के भाषा सूची में सम्मिलत किए जाने संबंधित ज्ञापन सौंपा। फिर उसके बाद पंद्रह नवंबर को मंत्रालय की ओर से इस आग्रह को स्वीकृति प्रदान करने वाली पत्र सांसद सीपी ठाकुर को निर्गत किया गया। दो दिसंबर को डॉ. सीपी ठाकुर की ओर से यह पत्र डॉ. जय प्रकाश चौधरी जनक, मणिकांत झा व हीरा कुमार झा को हस्तगत किया गया जो आग की तरह पूरे देश में फैल गई।

माध्यमिक स्तर पर छात्र कर सकेंगे अध्ययन
जारी पत्र में बोर्ड स्पस्ट रूप से कहा है कि अगर पुस्तक की उपलब्धता हो तो बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालय के आग्रह पर छात्र छात्राओं को मैथिली भाषा के अध्ययन की अनुमति प्रदान की जाएगी। बोर्ड के इस निर्णय से एक ओर जहां मैथिली भाषा की गरिमा बढ़ी है वही दूसरी ओर लाखों छात्रों के लिए स्कूली स्तर पर इस भाषा के अध्ययन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। मैथिली पुस्तक लतमारा के लेखक व मैथिली के लब्धप्रतिष्ठित विद्वान धीरेंद्र नरायण झा धीर ने बोर्ड के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है और भाषा के विकास में सहायक साबित होगा।





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