

देशज टाइम्स विशेष: India Foreign Policy: अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बिसात पर भारत एक नई चाल चल रहा है, जहां सुरक्षा और समृद्धि की धुरी पर दो बड़े खिलाड़ी अपनी रणनीतिक मोहर लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आक्रामक और स्पष्ट दृष्टिकोण आज नए भारत की दिशा तय कर रहा है।
India Foreign Policy: मोदी की वैश्विक चाल, योगी का औद्योगिक दांव—नए भारत की नई दिशा
भारत का विदेशी संबंध अब केवल राजनयिक प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामरिक स्वायत्तता, सुरक्षा साझेदारी और तकनीकी शक्ति के प्रदर्शन का एक विराट मंच बन गया है। एक ओर प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत का परचम लहरा रहे हैं, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए सीधे दुनिया के निवेश केंद्रों में दस्तक दे रहे हैं। दोनों नेताओं की विदेश यात्राएँ एक सुविचारित रणनीति का हिस्सा हैं, जिसमें भारत को एक वैश्विक शक्ति और उत्तर प्रदेश को देश का औद्योगिक इंजन बनाने का स्पष्ट रोडमैप नजर आता है।
India Foreign Policy: मोदी की इजराइल यात्रा और वैश्विक शक्ति संतुलन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल अवीव यात्रा पश्चिम एशिया की राजनीति में एक निर्णायक दस्तक है। इजराइल में उनके स्वागत को लेकर वहाँ के मीडिया में उत्साह साफ दिखाई दे रहा है, जो इस बात का संकेत है कि यह दौरा सामान्य नहीं, बल्कि ऐतिहासिक है। मोदी इस बार इजराइल की संसद नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनकर इतिहास रचेंगे। 2017 की अपनी ऐतिहासिक यात्रा के बाद मोदी का यह दूसरा इजराइल दौरा है, और इस बार इसका एजेंडा और भी व्यापक है। रक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, वित्तीय सहयोग और सीमा पार भुगतान प्रणाली जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को नई गहराई देने पर जोर दिया जा रहा है।
इस दौरे का निमंत्रण स्वयं इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दिया था, जिन्होंने इसे ऐतिहासिक बताते हुए मोदी को “प्रिय मित्र” कहा। दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत समीकरणों को भारत इस बार रणनीतिक लाभ में बदलना चाहता है। इजराइल की रक्षा तकनीक, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, जल संरक्षण और कृषि प्रौद्योगिकी में महारत भारत के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। भारत अब तकनीकी और सुरक्षा साझेदारी का वैश्विक केंद्र बनना चाहता है, इसलिए मोदी की इजराइल यात्रा पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। खास बात यह भी है कि पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच भारत संतुलन साधते हुए इजराइल के साथ खुलकर खड़ा है। यह अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों तक स्पष्ट संकेत है कि नई दिल्ली अपनी सामरिक स्वायत्तता पर अडिग है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
योगी का पूर्वी एशिया दौरा: उत्तर प्रदेश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की पहल
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिंगापुर और जापान की चार दिवसीय यात्रा का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को भारत का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। मुख्यमंत्री योगी ने सिंगापुर में गूगल, टेमासेक, जीआईसी, डीबीएस बैंक, ब्लैकस्टोन और डेटा सेंटर से जुड़ी बड़ी कंपनियों के साथ बैठकें कीं। डेटा सेंटर, कृषि व्यवसाय, लॉजिस्टिक्स, सौर ऊर्जा, फिनटेक और स्टार्टअप निवेश पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई और उत्तर प्रदेश ने बड़े निवेश प्रस्ताव हासिल किए। जापान में मुख्यमंत्री योगी ने सुजुकी, कुबोटा, तोशिबा और सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के साथ संवाद किया। यहां मुख्यमंत्री का जोर ग्रीन हाइड्रोजन, ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण पर रहा।
योगी खुद को उत्तर प्रदेश का सीईओ बताकर सीधे निवेशकों से जी टू बी (गवर्नमेंट टू बिजनेस) बैठकें कर रहे हैं। वह कानून व्यवस्था की सुदृढ़ स्थिति, विशाल भूमि बैंक, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और 25 करोड़ आबादी की उपभोक्ता शक्ति को निवेश का आधार बना रहे हैं। संदेश स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश अब दंगा, अपराध और पिछड़ेपन की पहचान से बाहर निकलकर उद्योग, निवेश और रोजगार की नई पहचान गढ़ रहा है। मुख्यमंत्री की यह यात्रा केवल पूंजी जुटाने का प्रयास नहीं, बल्कि ब्रांड यूपी को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की एक दूरगामी निवेश कूटनीति का हिस्सा है। योगी पूर्वी एशिया में खड़े होकर यह संदेश दे रहे हैं कि भारत का सबसे बड़ा राज्य अब वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनने को तैयार है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
केंद्र और राज्य की दोहरी कूटनीति: भारत के लिए रणनीतिक लाभ
देखा जाए तो प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम एशिया में सुरक्षा, रक्षा और प्रौद्योगिकी का संदेश दे रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री योगी पूर्वी एशिया में निर्माण, पूंजी और औद्योगिक विस्तार का एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं। एक ओर इजराइल के साथ रणनीतिक साझेदारी गहरी हो रही है, दूसरी ओर सिंगापुर और जापान से निवेश और तकनीक खींचने की तैयारी है। यह दोहरी कूटनीति बताती है कि भारत अब बहुस्तरीय वैश्विक रणनीति पर काम कर रहा है। केंद्र सुरक्षा और विदेश नीति के बड़े फ्रेम को मजबूत कर रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश आर्थिक शक्ति का इंजन बनने की होड़ में है।
मोदी का इजराइल दौरा पाकिस्तान और चीन दोनों के लिए संकेत है कि भारत रक्षा तकनीक और खुफिया सहयोग में नई छलांग लगाने को तैयार है। वहीं योगी का जापान दौरा चीन प्लस वन रणनीति के दौर में भारत को मैन्युफैक्चरिंग विकल्प के रूप में पेश करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इन दोनों यात्राओं का सीधा असर भारत की घरेलू राजनीति पर भी पड़ेगा। मोदी अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मजबूत और निर्णायक नेता की छवि को और धार दे रहे हैं। इससे विपक्ष के उस नैरेटिव को चुनौती मिलती है जो विदेश नीति को लेकर सवाल उठाता है। वहीं योगी अपने राज्य में विकास और निवेश के एजेंडे को आक्रामक ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं। यदि निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतरते हैं तो यह रोजगार, उद्योग और राजस्व में वृद्धि लाएगा। इसका सीधा राजनीतिक लाभ भाजपा को मिलेगा।
बहरहाल, एक तरफ वैश्विक मंच पर भारत की रणनीतिक ताकत का प्रदर्शन हो रहा है तो दूसरी तरफ भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश को आर्थिक महाशक्ति बनाने की मुहिम चल रही है। यह एक दोधारी रणनीति है जिसका संदेश स्पष्ट है कि भारत अब निर्णायक शक्ति बनने की राह पर है।





