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फ़रवरी, 25, 2026
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निवेशकों का नया ठिकाना: Gold Price में दिख रहा है स्थायी बदलाव का संकेत!

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Gold Price: वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ते उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतें एक बार फिर निवेशकों का ध्यान खींच रही हैं। पिछले कुछ समय से सोने की चाल में अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन विशेषज्ञ इसे महज एक अस्थायी उछाल नहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में एक गहरे और स्थायी बदलाव का संकेत मान रहे हैं, जो भविष्य के निवेश रणनीतियों को फिर से परिभाषित कर सकता है।

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निवेशकों का नया ठिकाना: Gold Price में दिख रहा है स्थायी बदलाव का संकेत!

बदलती आर्थिक परिस्थितियों में Gold Price का बढ़ता महत्व

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की हालिया रिपोर्ट बताती है कि सोने में आई मौजूदा तेजी सिर्फ बाजार के क्षणिक रुझानों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह निवेशकों और केंद्रीय बैंकों की बदलती सोच का स्पष्ट प्रमाण है। यह दर्शाता है कि अब निवेश के पारंपरिक मापदंडों के अलावा, व्यापक आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक सुरक्षा पर अधिक जोर दिया जा रहा है।

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पारंपरिक रूप से सोने की कीमतें वास्तविक ब्याज दरों के विपरीत चलती हैं, लेकिन 2023 से 2025 के दौरान सकारात्मक ब्याज दरों के बावजूद सोने में लगातार तेजी देखी गई है। यह असामान्य प्रवृत्ति बताती है कि निवेशक अब केवल ब्याज दरों के आंकड़ों पर निर्भर नहीं हैं। इसके बजाय, वे बढ़ती वित्तीय अस्थिरता, वैश्विक कर्ज दबाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं जैसे व्यापक कारकों पर गहराई से विचार कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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मोतीलाल ओसवाल के एनालिस्ट मनव मोदी बताते हैं कि सोना अब सिर्फ महंगाई के खिलाफ बचाव का एक साधन नहीं रह गया है। यह भविष्य में उत्पन्न होने वाले संभावित आर्थिक और वित्तीय संकटों के दौरान पूंजी को सुरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है, जिसने इसे निवेशकों के पोर्टफोलियो में एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

भारत में बढ़ती मांग और वैश्विक कारक

दुनिया भर में सोने का उत्पादन सीमित है, और नए खनन परियोजनाओं को शुरू करने में काफी समय और भारी निवेश लगता है। वहीं, भारत सहित कई उभरते बाजारों में घरेलू मुद्राओं के कमजोर होने से स्थानीय स्तर पर सोने की कीमतें बढ़ी हैं। इन देशों में सांस्कृतिक महत्व और आर्थिक सुरक्षा की भावना के कारण सोने की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। गोल्ड ETF में निवेश भी एक बार फिर से बढ़ रहा है, जो इसकी मांग को और बढ़ावा दे रहा है।

वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताएं, अमेरिकी टैरिफ और व्यापार विवादों ने निवेशकों के भरोसे को एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर मोड़ दिया है। फर्म की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में, स्थिर महंगाई और बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोना एक भरोसेमंद सुरक्षित निवेश बना हुआ है। इसके साथ ही, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं, जिससे इसकी कीमतों को मजबूत समर्थन मिल रहा है। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि सिर्फ खुदरा निवेशक ही नहीं, बल्कि बड़े संस्थागत खरीदार भी सोने को भविष्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति मान रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

इन सभी कारकों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि सोने की वर्तमान तेजी केवल एक बाजार चक्र का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक आर्थिक बदलाव का प्रतिबिंब है जहां सुरक्षा, स्थिरता और दीर्घकालिक मूल्य संरक्षण प्राथमिक चिंताएं बन गई हैं।

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