

Teacher Protest: शिक्षा की मशाल थामने वाले शिक्षकों के अपने ही हाथ खाली हैं, और अब वे अपने हक की आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। बुधवार को सन्हौला में वित्त रहित शिक्षकों का दर्द सड़कों पर दिखा, जब उन्होंने अनुदान के बदले स्थायी वेतनमान की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
Teacher Protest: शिक्षा की मशाल थामने वाले शिक्षकों के अपने ही हाथ खाली हैं, और अब वे अपने हक की आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। बुधवार को सन्हौला में वित्त रहित शिक्षकों का दर्द सड़कों पर दिखा, जब उन्होंने अनुदान के बदले स्थायी वेतनमान की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन वित्त रहित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर संयुक्त संघर्ष मोर्चा, पटना के राष्ट्रव्यापी आह्वान का हिस्सा था।
Teacher Protest को लेकर क्या हैं प्रमुख मांगें?
सन्हौला प्रखंड स्थित ताड़र कॉलेज के मुख्य द्वार पर इंटर और डिग्री कॉलेज के शिक्षक और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर एक दिवसीय अनशन और धरने पर बैठे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने अपनी पांच सूत्री मांगें रखीं, जिसमें सबसे प्रमुख मांग अनुदान प्रणाली को खत्म कर स्थायी वेतनमान और पेंशन लागू करना है। शिक्षकों का कहना था कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें सम्मानजनक वेतन नहीं मिल रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने पिछले सात वर्षों के बकाया अनुदान का एकमुश्त भुगतान करने की भी जोरदार मांग उठाई। उनका कहना है कि बकाया राशि नहीं मिलने से उनके परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर प्रदर्शन
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व ताड़र कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य प्रो. विशेश्वर प्रसाद सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां वित्त रहित शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका संघर्ष जारी रहेगा। कॉलेज के सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने भी अपने संबोधन में शिक्षकों की पीड़ा को व्यक्त किया और कहा कि अब वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे, उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
इस धरना-प्रदर्शन में कॉलेज के तमाम प्रमुख शिक्षक और कर्मचारी शामिल हुए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वक्ताओं में प्रो. सकलदेव मंडल, प्रो. दीपक कुमार, प्रो. मुकेश कुमार, प्रो. संजय प्रसाद साहा, मिंटू कुमार, प्रो. उमेश सिंह, रामबिलास शर्मा और कुणाल कुमार समेत अन्य कॉलेज कर्मियों ने भी अपने विचार रखे और सरकार से तत्काल उनकी मांगों पर ध्यान देने का आग्रह किया।





