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फ़रवरी, 26, 2026
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Holika Dahan 2026 और चंद्र ग्रहण: जानें शुभ मुहूर्त और ज्योतिषीय प्रभाव

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Holika Dahan 2026: इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा का पावन पर्व विशेष संयोग लेकर आ रहा है, क्योंकि होलिका दहन के साथ ही चंद्र ग्रहण का अद्भुत खगोलीय नजारा भी देखने को मिलेगा। यह स्थिति कई ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं को प्रभावित कर सकती है, इसलिए सही समय, सूतक और ग्रहण के प्रभावों को जानना अत्यंत आवश्यक है।

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Holika Dahan 2026 और चंद्र ग्रहण: जानें शुभ मुहूर्त और ज्योतिषीय प्रभाव

Holika Dahan 2026 पर क्या कहते हैं ज्योतिष?

फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन का विधान है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस वर्ष, 3 मार्च 2026 को पड़ने वाली फाल्गुन पूर्णिमा पर, जहां एक ओर Holika Dahan 2026 की तैयारियां होंगी, वहीं दूसरी ओर चंद्र ग्रहण का संयोग भी बनेगा। यह स्थिति भक्तों और ज्योतिष प्रेमियों के मन में कई प्रश्न उत्पन्न कर रही है कि क्या ग्रहण के कारण होलिका दहन की शुभता प्रभावित होगी और क्या सूतक काल के नियम लागू होंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों में होलिका दहन के लिए **भद्रा काल** का त्याग करना अनिवार्य माना गया है। भद्रा काल में होलिका दहन करने से अशुभ फल प्राप्त होते हैं, इसलिए इस अवधि में सावधानी बरती जाती है।

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होलिका दहन की पौराणिक कथा और महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्यकश्यप नामक एक अहंकारी राजा था जिसने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया था। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठने का आदेश दिया, क्योंकि होलिका को वरदान था कि वह अग्नि से अप्रभावित रहेगी। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जलकर भस्म हो गई। यह घटना असत्य पर सत्य की और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। वहीं, चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसे ज्योतिष में विशेष महत्व दिया जाता है। ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है, इसलिए कई धार्मिक कार्य वर्जित होते हैं।

होलिका दहन की विधि

  • होलिका दहन से पूर्व एक दिन पहले होलिका स्थापित की जाती है, जिसमें लकड़ी, उपले और सूखे पत्ते एकत्र किए जाते हैं।
  • होलिका दहन के दिन शुभ मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • होलिका के पास पूर्व दिशा में मुख करके बैठें और पूजन सामग्री एकत्र करें।
  • गोबर से बनी होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमा स्थापित करें।
  • कच्चे सूत को तीन या सात बार होलिका के चारों ओर लपेटें।
  • जल, रोली, चावल, फूल, गुलाल, बताशे, कंडे, मिठाइयां और नई फसल के अनाज (जैसे गेहूं की बालियां, चने) आदि से पूजन करें।
  • घी का दीपक जलाकर आरती करें और होलिका की परिक्रमा करें।
  • होलिका दहन के बाद राख को घर लाकर माथे पर लगाने की परंपरा है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
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चंद्र ग्रहण का सूतक काल और उसके नियम

चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल का विशेष महत्व होता है, जिसमें शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और भोजन पकाना या ग्रहण करना वर्जित होता है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

ग्रहण के दौरान भगवान का नाम जपना, मंत्र जाप करना और ध्यान करना शुभ फलदायी होता है। ग्रहण समाप्त होने पर स्नान कर नए वस्त्र धारण करने चाहिए और घर तथा पूजा स्थल की शुद्धि करनी चाहिए।

होलिका दहन और चंद्र ग्रहण 2026 शुभ मुहूर्त

विवरणसमय (मार्च 3, 2026)
फाल्गुन पूर्णिमा तिथि आरंभसुबह 08:30 बजे
फाल्गुन पूर्णिमा तिथि समाप्तसुबह 05:45 बजे (मार्च 4)
होलिका दहन शुभ मुहूर्तशाम 06:20 बजे से रात 08:35 बजे तक
भद्रा काल प्रारंभसुबह 08:30 बजे
भद्रा काल समाप्तशाम 06:15 बजे
चंद्र ग्रहण प्रारंभरात 09:00 बजे
चंद्र ग्रहण समाप्तरात 12:00 बजे (मार्च 4)
सूतक काल प्रारंभदोपहर 12:00 बजे
सूतक काल समाप्तरात 12:00 बजे (मार्च 4)
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पूजन मंत्र

अद्यपूर्णिमायां पुण्यतिथौ अमुकगोत्रोत्पन्नः अमुकनामा अहं होलिका दहनं करिष्ये।

ॐ श्री विष्णवे नमः।

इस विशेष फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का संयोग हमें सतर्कता और श्रद्धा के साथ पर्व मनाने का संदेश देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। होलिका दहन के समय **भद्रा काल** का विशेष ध्यान रखें और चंद्र ग्रहण के सूतक काल में शुभ कार्यों से बचें। ग्रहण के दौरान भगवान का स्मरण करें, मंत्र जाप करें और दान-पुण्य के कार्य करें। ग्रहण समाप्त होने पर स्नान कर घर की शुद्धि करें। यह अवधि हमें आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन उपायों से ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है और पर्व की शुभता बनी रहती है।

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