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Bihar News: Peaceful Protest पर ‘लाठी-तंत्र’ हावी? कांग्रेस प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि मो.असलम का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, कहा- सवाल पूछना भी हुआ गुनाह

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Peaceful Protest: सियासत की बिसात पर जब आवाज़ को ही ‘अपराध’ मान लिया जाए, तो समझिए कि खेल के नियम बदल दिए गए हैं। बिहार कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर कुछ ऐसे ही गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि देश में अब शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना सबसे बड़ा गुनाह बन गया है। प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि मो. असलम ने एक बयान जारी कर कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को धीरे-धीरे ऐसी दिशा में धकेला जा रहा है, जहां असहमति को देशद्रोह और सवाल पूछने को साज़िश बताया जाता है।

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क्या हर Peaceful Protest का जवाब लाठी है?

कांग्रेस प्रतिनिधि ने केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज मुद्दा कोई भी हो, अगर आप सत्ता के खिलाफ संवैधानिक तरीके से आवाज़ उठाते हैं, तो लाठी, मुकदमा और जेल मिलना लगभग तय हो गया है। उन्होंने अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए हाल के दिनों में हुए कई विरोध प्रदर्शनों का उदाहरण दिया, जिन्हें कथित तौर पर बलपूर्वक कुचल दिया गया। यह हमारे लोकतंत्र के लिए एक चिंता का विषय बनता जा रहा है।

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उनके अनुसार, सरकार के खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ को दबाने की कोशिश की गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कई घटनाओं का सिलसिलेवार जिक्र किया:

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  • पेपर लीक: जब पेपर लीक से त्रस्त युवाओं ने अपने भविष्य के लिए आवाज़ उठाई, तो उन्हें जवाब में लाठियां मिलीं।
  • महिला पहलवान: देश की गौरवशाली महिला पहलवानों ने BJP के एक प्रभावशाली नेता पर लगे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की, लेकिन उनके आंदोलन को कुचल दिया गया।
  • इंडिया गेट प्रदर्शन: एक बलात्कार पीड़िता के समर्थन में इंडिया गेट पर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन को व्यवस्था के लिए “असुविधा” मानकर हटा दिया गया।
  • किसान आंदोलन: जब किसानों ने अपने अधिकारों के लिए आंदोलन किया, तो उन्हें देशविरोधी करार दिया गया और उन पर आंसू गैस, रबर की गोलियां और पानी की बौछारें इस्तेमाल की गईं।
  • आदिवासी अधिकार: जब आदिवासियों ने अपने जल, जंगल, जमीन के हक के लिए आवाज़ बुलंद की, तो उन पर भी शक की नज़र डाली गई, मानो अपने अधिकार मांगना कोई अपराध हो।
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कांग्रेस ने पूछा – यह कैसा लोकतंत्र?

मो. असलम ने अपने बयान के अंत में तीखे सवाल दागते हुए कहा, “यह कैसा लोकतंत्र है, जहां सवालों से डरा जाता है? जहां असहमति को कुचलना ही शासन का स्वभाव बनता जा रहा है?” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांतिपूर्ण विरोध करना कोई अपराध नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है। सवाल पूछना लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

उन्होंने कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र की पहचान यही है कि सरकार अपनी आलोचना को सुने, उसका जवाब दे और जनता के प्रति जवाबदेह बनी रहे। आज देश में इसी भावना को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है, जो चिंताजनक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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