

Holika Dahan 2026: फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन का पावन पर्व मनाया जाता है। यह अग्नि बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, किंतु हमारी प्राचीन परंपराओं और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस अग्नि की तपिश कुछ विशेष व्यक्तियों के लिए शुभ नहीं मानी जाती है।
Holika Dahan 2026: होलिका दहन की अग्नि से दूर रहें ये लोग
होली के आगमन से पूर्व मनाई जाने वाली होलिका दहन का महत्व भारतीय संस्कृति में अत्यंत गहरा है। यह अंधकार पर प्रकाश और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अग्नि में सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाएं भस्म हो जाती हैं, जिससे वातावरण शुद्ध होता है। लेकिन, कुछ विशेष परिस्थितियों में या कुछ खास व्यक्तियों को इस पावन अग्नि से दूर रहने की सलाह दी जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से वे अनिष्टकारी प्रभावों से सुरक्षित रहते हैं।
Holika Dahan 2026: जानिए किन लोगों को रहना चाहिए दूर
ज्योतिष शास्त्र और लोक परंपराओं के अनुसार, कुछ विशेष वर्ग के लोगों को होलिका दहन की अग्नि से प्रत्यक्ष रूप से दूर रहना चाहिए। इसका कारण न केवल शारीरिक सुरक्षा है, बल्कि आध्यात्मिक और ऊर्जावान संतुलन भी है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें
* **गर्भवती महिलाएं (Pregnant Women):**
गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन की अग्नि से दूर रहने की सलाह दी जाती है। `धार्मिक मान्यताएं` हैं कि इस समय नकारात्मक ऊर्जाएं अधिक प्रबल होती हैं, जो गर्भस्थ शिशु पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं। इसके अतिरिक्त, अग्नि से निकलने वाला धुंआ और तीव्र गर्मी भी गर्भवती महिला और शिशु के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।
* **नवविवाहित स्त्रियां (Newlywed Women):**
कुछ परंपराओं के अनुसार, नई-नई शादी हुई दुल्हनों को अपनी पहली होलिका दहन ससुराल में देखने से बचना चाहिए। यह माना जाता है कि ऐसा करने से उनके दांपत्य जीवन में कोई अनिष्ट आ सकता है। हालांकि, कुछ स्थानों पर इस नियम में भिन्नता हो सकती है, लेकिन सामान्यतः सावधानी बरती जाती है।
* **इकलौती संतान की माताएं (Mothers of Only Children):**
जिन माताओं की केवल एक संतान हो, उन्हें भी होलिका दहन देखने से दूर रहने की सलाह दी जाती है। यह मान्यता बच्चे की सुरक्षा और उसके दीर्घायु जीवन की कामना से जुड़ी है। माताएं अपनी इकलौती संतान के जीवन पर किसी भी संभावित नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए इस परंपरा का पालन करती हैं।
* **छोटे बच्चे (Young Children):**
छोटे बच्चों को भी होलिका दहन की तीव्र अग्नि और धुंए से दूर रखना चाहिए। यह न केवल उनकी शारीरिक सुरक्षा (जलने का खतरा, धुंए से श्वास संबंधी समस्या) के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि उन्हें अत्यधिक उत्तेजित करने वाली या भयभीत करने वाली ऊर्जा से बचाने के लिए भी आवश्यक है।
* **बीमार या वृद्ध व्यक्ति (Sick or Elderly Individuals):**
बीमार या अत्यधिक वृद्ध व्यक्तियों को भी होलिका दहन के स्थान से दूर रहने की हिदायत दी जाती है। अग्नि से निकलने वाला धुंआ, धूल और भीड़ उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों के लिए यह अधिक जोखिम भरा हो सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
**निष्कर्ष और उपाय:**
इन परंपराओं का मूल उद्देश्य व्यक्तियों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करना है। यदि आप उपरोक्त श्रेणियों में से किसी में आते हैं, तो आप घर पर रहकर ही होलिका दहन का स्मरण कर सकते हैं। अपने आराध्य का ध्यान करें, दीपक प्रज्वलित करें और मन ही मन होलिका माता से सभी नकारात्मक शक्तियों के नाश की प्रार्थना करें। इस तरह, आप परंपरा का सम्मान भी कर पाएंगे और स्वयं को सुरक्षित भी रख पाएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

