

Defence Deal: प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है, और सबसे ज्यादा चर्चा भारत-इजरायल के बीच होने वाले रक्षा समझौते (Defence Deal) पर हो रही है। यह सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा रणनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
# भारत-इजरायल Defence Deal: क्या यह भारत के लिए गेम-चेंजर साबित होगी?
## भारत-इजरायल Defence Deal: सुरक्षा कवच का नया युग
ख़बरों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 8-10 बिलियन डॉलर के रक्षा समझौते हो सकते हैं। इन समझौतों में सिर्फ हथियार ही नहीं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तकनीक का हस्तांतरण भी शामिल होगा। यह डील भारत की 15,000 किलोमीटर लंबी जमीनी सीमा और 7,500 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा को सुरक्षित करने के लिए ‘सुदर्शन चक्र मिसाइल शील्ड’ बनाने में मदद करेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस व्यापक सुरक्षा प्रणाली में इजरायल की विश्व-प्रसिद्ध मिसाइलें शामिल हैं, जो रॉकेट, ड्रोन और बैलिस्टिक खतरों को बेअसर करने में सक्षम हैं:
* आयरन डोम (Iron Dome)
* आयरन बीम (Iron Beam)
* डेविड्स स्लिंग (David’s Sling)
* एरो (Arrow)
* गोल्डन होराइजन (Golden Horizon)
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह रक्षा साझेदारी चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘Iron Dome Technology’ के भारत में आने से देश को 2035 तक दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों में से एक बनाने में मदद मिलेगी।
## सामरिक और तकनीकी साझेदारी का महत्व
‘सुदर्शन चक्र मिसाइल शील्ड’ की परिकल्पना भारत को भविष्य के हवाई हमलों से अभेद्य बनाने के लिए की गई है। इस तकनीक के आने से भारत अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत कर पाएगा, जो लंबे समय से देश की एक प्रमुख ज़रूरत रही है। यह समझौता न केवल सैन्य सहयोग को बढ़ावा देगा बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को भी नई ऊँचाई देगा। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/। यह भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, विशेषकर ‘Iron Dome Technology’ जैसी प्रणालियों के स्थानीय उत्पादन और विकास की संभावनाओं को देखते हुए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

