

Ravi Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का अत्यधिक महत्व है, विशेषकर जब यह रविवार को पड़े। फाल्गुन मास का अंतिम प्रदोष व्रत, जो रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है, भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। इस शुभ दिन पर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने से आरोग्य, सुख-समृद्धि और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
रवि प्रदोष व्रत 2026: फाल्गुन मास के अंतिम रवि प्रदोष व्रत पर करें ये उपाय, शिवजी देंगे आरोग्य का वरदान
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाला रवि प्रदोष व्रत 1 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत सूर्य ग्रह के अशुभ प्रभावों को कम करने और कुंडली में सूर्य को मजबूत करने में सहायक है। यह व्रत रखने से व्यक्ति को दीर्घायु, स्वास्थ्य और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जहां हम आपको शिव पूजा के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराएंगे। इस दिन भक्तजन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
रवि प्रदोष व्रत: पूजा विधि और महत्व
फाल्गुन रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि अत्यंत सरल और फलदायी है:
- व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर की साफ-सफाई कर गंगाजल छिड़कें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
- पूजा का संकल्प लें।
- सबसे पहले शिवलिंग पर जल अर्पित करें, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का मिश्रण) से अभिषेक करें।
- इसके बाद दोबारा शुद्ध जल से अभिषेक करें।
- शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, कनेर, शमी पत्र, सफेद चंदन, भांग और अन्य मौसमी फूल अर्पित करें।
- माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री, लाल वस्त्र और फूल चढ़ाएं।
- धूप, दीप जलाकर भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
शुभ मुहूर्त 1 मार्च 2026 (रविवार) के लिए:
| पूजा का समय | विवरण |
|---|---|
| प्रदोष काल | शाम 06:15 बजे से रात 08:35 बजे तक |
| त्रयोदशी तिथि प्रारंभ | 1 मार्च 2026, सुबह 05:40 बजे |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | 2 मार्च 2026, सुबह 04:00 बजे |
भगवान शिव के शक्तिशाली मंत्र:
ॐ नमः शिवाय।
महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
रवि प्रदोष व्रत का पालन करने और सच्ची श्रद्धा से शिव पूजा करने वाले भक्तों को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्रत शारीरिक व्याधियों से मुक्ति दिलाता है और मान-सम्मान में वृद्धि करता है। प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में शांति आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। व्रत के दिन गरीबों को दान करना और गाय को चारा खिलाना भी शुभ माना जाता है। इस प्रकार, फाल्गुन मास का यह अंतिम प्रदोष व्रत एक महत्वपूर्ण अवसर है, जब हम भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।



