

Bihar Politics: बिहार विधानसभा का गलियारा, जहां हर दिन सियासत की बिसात बिछती है, शुक्रवार को एक नए दांव-पेंच का गवाह बना। विपक्षी दलों ने सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर सरकार को घेरने की कोशिश की।
शुक्रवार को बिहार विधानसभा परिसर में एक बार फिर गरमाई सियासत देखने को मिली। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने सामाजिक और आर्थिक विषमताओं के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विशेष रूप से, राजद ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी लघु उद्यमी योजना से 94 लाख दलित और अति पिछड़ा परिवारों को जोड़ने की मांग उठाई। विधायकों ने हाथों में तख्तियां लिए हुए ‘गरीबों को हक दो’, ‘योजना का लाभ सबको मिले’ जैसे नारे लगाए। यह मांग तब उठी है जब राज्य में रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।
Bihar Politics: विधानसभा में क्यों गरमाई सियासत?
राजद के वरिष्ठ नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार ने योजना तो बना दी है, लेकिन उसका लाभ निचले तबके तक नहीं पहुंच पा रहा है। उनका कहना था कि यदि 94 लाख परिवारों को इस **सरकारी योजना** से जोड़ा जाए, तो इससे राज्य में आर्थिक क्रांति आ सकती है और बेरोजगारी कम हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
लघु उद्यमी योजना: क्या है विपक्ष की चिंता?
लघु उद्यमी योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के गरीब परिवारों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना है। इसके तहत प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को ₹2 लाख तक की सहायता प्रदान की जाती है ताकि वे अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें। विपक्ष का आरोप है कि इस योजना का क्रियान्वयन धीमा है और इसका लाभ केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक ही पहुंच रहा है, जबकि बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवार इससे वंचित हैं। उनकी मांग है कि योजना के दायरे को बढ़ाया जाए और लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
इस प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सदस्यों ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर भी जोरदार हंगामा किया। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और ठोस कदम उठाने की अपील की। राजद का कहना है कि वे गरीब और वंचितों के हक की लड़ाई तब तक लड़ते रहेंगे, जब तक सभी पात्र परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिल जाता। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विधानसभा सत्र के दौरान इस तरह के प्रदर्शन आम हैं, लेकिन यह विशेष रूप से दलित और अति पिछड़ा वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण के मुद्दे को केंद्र में लाने के कारण महत्वपूर्ण हो जाता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। सरकार की ओर से अभी तक इस विरोध प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उम्मीद है कि सत्र के दौरान इस मुद्दे पर बहस हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




