

Delhi Politics: दिल्ली की सियासी बिसात पर एक और चाल चली गई है, जहां आरोपों की गिरफ्त से एक दिग्गज नेता बाहर आया है, तो सियासत की बिसात पर नई बहस छिड़ गई है। दिल्ली की एक अदालत द्वारा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब नीति मामले से बरी किए जाने के बाद बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर दिल्ली में दोबारा विधानसभा चुनाव कराने की मांग उठाकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। तेजस्वी ने इस फैसले के बाद केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जो राजनीतिक पंडितों के लिए नए बहस का मुद्दा बन गया है।
Delhi Politics: तेजस्वी यादव के बड़े सवाल
तेजस्वी यादव ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब यह साबित हो गया है कि केजरीवाल के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार थे, तो उन पर कार्रवाई किस आधार पर हुई? उन्होंने इस पूरे प्रकरण को केंद्र सरकार की बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया। तेजस्वी ने कहा कि जब अदालत ने ही मामले को खारिज कर दिया है, तो इससे साफ है कि इन जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए किया जा रहा था। यह घटनाक्रम दिखाता है कि कैसे संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करके विपक्ष को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विपक्ष पर कार्रवाई और जांच एजेंसियों की भूमिका
राजद नेता ने इस बात पर जोर दिया कि अगर केजरीवाल निर्दोष साबित हुए हैं, तो फिर दिल्ली में चुनाव कराने में क्या दिक्कत है? उनका मानना है कि इस फैसले से दिल्ली की जनता का विश्वास बहाली में मदद मिलेगी और लोकतंत्र की मर्यादा भी कायम रहेगी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ केजरीवाल का मामला नहीं है, बल्कि देश भर में कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ इसी तरह से मामले दर्ज किए गए हैं, जिनका मकसद उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करना है। तेजस्वी यादव के बयान ने एक बार फिर जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार में थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो उसे इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और उन अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए जिन्होंने झूठे आरोप लगाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जो आपको हर ख़बर से अवगत कराता है। इस घटनाक्रम ने बिहार और दिल्ली दोनों राज्यों की राजनीति में गर्माहट ला दी है। तेजस्वी के इस बयान को 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। यह सिर्फ एक नेता की रिहाई का मामला नहीं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक संदेश है।


