

सत्ता के संग्राम में भाषा और संस्कृति की लड़ाई अब तेज हो चली है। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में हर दल अपनी पहचान बचाने को संघर्षरत है।
Uddhav Thackeray: इस सियासी बिसात पर शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर सीधा हमला बोलकर नई बहस छेड़ दी है, जहां उन्होंने ‘सांस्कृतिक वर्चस्व’ की राजनीति का आरोप लगाया है। मराठी गौरव दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी क्षेत्रीय पहचान को मिटाकर हिंदी की सर्वोच्चता स्थापित करने के मिशन पर है। यह सिर्फ महाराष्ट्र की नहीं, बल्कि पूरे देश की भाषाई विविधता पर हमला है।
Uddhav Thackeray का भाजपा पर सीधा वार: क्षेत्रीय पहचान मिटाने की कोशिश
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भाजपा की नीतियां क्षेत्रीय भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों को खत्म करने पर केंद्रित हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य हिंदी को सर्वोपरि बनाना है, जो देश की संघीय ढांचे के लिए हानिकारक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मराठी अस्मिता पर किसी भी प्रकार का हमला स्वीकार्य नहीं होगा।
उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि भाजपा शिवसेना (उबाठा) को इसलिए खत्म करना चाहती है क्योंकि वह अच्छी तरह जानती है कि जब तक यह पार्टी अस्तित्व में है, ‘मराठी मानुष’ सम्मान और गर्व के साथ खड़े रहेंगे। यह सिर्फ एक राजनीतिक दल को कमजोर करने का प्रयास नहीं है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बल्कि यह मराठी संस्कृति और गौरव को मिटाने की साजिश है।
उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र को एक मजबूत क्षेत्रीय दल की आवश्यकता है, और शिवसेना (उबाठा) ही वह दल है जो मराठी हितों की रक्षा कर सकता है। ठाकरे ने किसी भी भाषा को लोगों पर थोपे जाने का विरोध किया। उन्होंने याद दिलाया कि मराठी के उपयोग को अनिवार्य करने वाली सरकार भी उन्हीं की थी।
ठाकरे ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार द्वारा मराठी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदम बाद की सरकारों द्वारा रोक दिए गए। उन्होंने मराठी भवन के निर्माण में हुई देरी पर भी चिंता व्यक्त की। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
सियासी गलियारों में गरमाई बहस
उद्धव ठाकरे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में आगामी महाराष्ट्र चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। भाषा और ‘मराठी अस्मिता’ का कार्ड खेलकर ठाकरे ने न केवल अपने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की कोशिश की है, बल्कि भाजपा को ‘मराठी विरोधी’ दिखाने का दांव भी चला है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में इस बयानबाजी का क्या असर होता है, क्योंकि महाराष्ट्र की राजनीति में भाषा और संस्कृति का मुद्दा हमेशा से ही संवेदनशील रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस राजनीतिक बयानबाजी ने राज्य में क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय राजनीति की बहस को और गहरा कर दिया है। शिवसेना (उबाठा) अपनी मराठी पहचान को मजबूत कर भाजपा के ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ के कथित एजेंडे का मुकाबला कर रही है, और यह एक महत्वपूर्ण रणनीति है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

