

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर नई-नई चर्चाएं और अपडेट्स सामने आ रहे हैं। इस बार सरकारी कर्मचारियों पर बढ़ती महंगाई के बोझ को कम करने के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण मांग उठाई गई है, जो सीधे उनके मासिक वेतन ढांचे को प्रभावित कर सकती है। यह खबर उन लाखों कर्मचारियों के लिए राहत भरी हो सकती है, जो लंबे समय से वेतन वृद्धि का इंतजार कर रहे हैं।
8th Pay Commission: कर्मचारियों को मिलेगी बंपर राहत, मूल वेतन में DA मर्जर की जोरदार मांग
8th Pay Commission: मूल वेतन में महंगाई भत्ता मर्ज करने की मांग क्यों?
फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन्स (FNPO) ने आठवें वेतन आयोग की चेयरपर्सन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को एक औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में FNPO ने सरकार से मांग की है कि 50 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) को केंद्रीय कर्मचारियों के मूल वेतन (Basic Pay) में मिला दिया जाए। संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि इसे 1 जनवरी, 2026 से ‘अंतरिम राहत’ के तौर पर लागू किया जाना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह कदम महंगाई के बढ़ते दबाव से कर्मचारियों को तत्काल राहत प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
- पिछले कुछ वर्षों में खाद्य पदार्थों, चिकित्सा उपचार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की जेब पर भारी दबाव पड़ा है।
- पूर्व में भी जब-जब महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर चुका है, तब-तब वेतन आयोगों ने महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए इसके एक हिस्से को मूल वेतन के साथ मर्ज करने की सलाह दी है।
- चूंकि हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस और ग्रेच्युटी जैसे कई भत्ते मूल वेतन पर निर्भर करते हैं, इसलिए महंगाई भत्ते को मर्ज करने से इन सभी लाभों में भी वृद्धि होगी, जिससे कर्मचारियों को दीर्घावधि में वित्तीय फायदा मिलेगा।
- यह भी तर्क दिया गया है कि आठवें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों की घोषणा और उनके लागू होने में काफी समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए यह अंतरिम कदम बेहद आवश्यक है।
रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव और वित्तीय लाभ
यदि सरकार कर्मचारियों की इस मांग को स्वीकार कर लेती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। सबसे पहले, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, क्योंकि यह सीधे मूल वेतन से जुड़ा होता है। सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए भी यह बेहद फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि उनकी पेंशन और ग्रेच्युटी की गणना बढ़े हुए मूल वेतन के आधार पर की जाएगी, जिससे उन्हें मिलने वाला भुगतान बढ़कर मिलेगा। इसके अतिरिक्त, मूल वेतन से जुड़े अन्य सभी भत्ते भी अपने आप बढ़ जाएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं: यदि आपकी वर्तमान मूल सैलरी 20,000 रुपये है और महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत है, तो आपको 10,000 रुपये महंगाई भत्ते के रूप में मिलते हैं। महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मर्ज करने के बाद, आपकी कुल मूल सैलरी 30,000 रुपये हो जाएगी। इसका मतलब है कि महंगाई भत्ते के तहत मिलने वाले 10,000 रुपये अब आपके मूल वेतन का हिस्सा बन जाएंगे। मूल वेतन बढ़ने से HRA के अलावा, भविष्य निधि (PF) में आपका योगदान बढ़ेगा और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी भी बढ़ जाएगी। भविष्य में यदि महंगाई भत्ता फिर से 3 या 4 प्रतिशत बढ़ता है, तो उसकी गणना पुरानी मूल सैलरी (20,000 रुपये) के बजाय नई और बढ़ी हुई मूल सैलरी (30,000 रुपये) पर की जाएगी, जिससे कर्मचारियों को और अधिक वित्तीय लाभ होगा। यह एक ऐसा कदम होगा जो केंद्रीय कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


