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फ़रवरी, 28, 2026
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मार्च 2026 में चंद्र ग्रहण: सूतक काल का महत्व और सावधानियां

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Chandra Grahan 2026: ब्रह्मांड की यह अद्भुत खगोलीय घटनाएँ हिन्दू धर्म में विशेष ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व रखती हैं। जब भी आकाश में ग्रहण लगता है, तो हमारे ऋषि-मुनियों ने इसके कुछ विशेष नियम और सावधानियां निर्धारित की हैं, जिनका पालन करना श्रेयस्कर माना गया है।

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मार्च 2026 में चंद्र ग्रहण: सूतक काल का महत्व और सावधानियां

चंद्र ग्रहण 2026: सूतक काल और उसके नियम

ब्रह्मांड की यह अद्भुत खगोलीय घटनाएँ हिन्दू धर्म में विशेष ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व रखती हैं। जब भी आकाश में चंद्र ग्रहण लगता है, तो हमारे ऋषि-मुनियों ने इसके कुछ विशेष नियम और सावधानियां निर्धारित की हैं, जिनका पालन करना श्रेयस्कर माना गया है। मार्च 2026 में लगने वाले चंद्र ग्रहण के संबंध में भी सूतक काल का विचार किया जा रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक चंद्र ग्रहण से पूर्व एक निश्चित अवधि के लिए सूतक काल प्रभावी होता है, जिसे अशुभ माना जाता है। इस अवधि में सभी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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सूतक काल का आरंभ ग्रहण के प्रकार और दृश्यता पर निर्भर करता है। चंद्र ग्रहण में सूतक काल आमतौर पर ग्रहण के आरंभ होने से नौ घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है और ग्रहण समाप्ति के साथ ही समाप्त होता है। इस काल में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है, जिससे कई प्रकार के ग्रहण दोष उत्पन्न हो सकते हैं। हालांकि, मार्च 2026 में पड़ने वाले चंद्र ग्रहण के लिए सूतक काल की सटीक अवधि और समय-सारणी, ग्रहण की प्रकृति (उपच्छाया, आंशिक या पूर्ण) और उसकी दृश्यता के आधार पर, धार्मिक विद्वानों और पंचांगों द्वारा ग्रहण से कुछ समय पूर्व ही विस्तृत रूप से जारी की जाएगी। यह आवश्यक है कि हम इन निर्देशों का पालन करें ताकि किसी भी प्रकार के अनिष्ट से बचा जा सके।

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सूतक काल में क्या करें और क्या न करें:

  • **क्या न करें:**
    • सूतक काल में किसी भी प्रकार का नया कार्य, शुभ कार्य या मांगलिक अनुष्ठान प्रारंभ न करें।
    • भोजन पकाने और ग्रहण करने से बचें। यदि पका हुआ भोजन हो, तो उसमें तुलसी के पत्ते या कुश डाल दें।
    • गर्भवती महिलाएं विशेष रूप से घर से बाहर न निकलें और न ही ग्रहण को देखें। उन्हें अपने इष्टदेव का स्मरण करना चाहिए।
    • मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं और पूजा-पाठ वर्जित होता है।
    • बाल काटना, नाखून काटना, शेविंग जैसे कार्य वर्जित होते हैं।
    • धातु या नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करें।
  • **क्या करें:**
    • इस दौरान ईश्वर का ध्यान, मंत्र जप (विशेषकर महामृत्युंजय मंत्र), और स्तोत्र पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
    • गर्भवती महिलाएं गर्भ रक्षा मंत्रों का जाप कर सकती हैं।
    • बच्चों, वृद्धों और रोगियों को भोजन ग्रहण करने की छूट होती है।
    • ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें, घर की शुद्धि करें और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को शुद्ध जल से स्नान कराएं।
    • ग्रहण के बाद दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।
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इस प्रकार की खगोलीय घटनाओं का ज्योतिष और धर्म में गहरा महत्व है। ग्रहण दोष से मुक्ति पाने और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए इन नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण माना गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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ग्रहण का समय आत्म-चिंतन और साधना के लिए उपयुक्त माना गया है। यह हमें प्रकृति और ब्रह्मांड की विशालता का स्मरण कराता है। सूतक काल और चंद्र ग्रहण के दौरान धैर्य और भक्ति भाव बनाए रखना चाहिए, क्योंकि यह अवधि आत्मिक शुद्धि और परमात्मा से जुड़ने का एक अवसर भी प्रदान करती है। इस दौरान किए गए जप-तप का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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