

Patna University Student Union Election: चुनाव की रणभूमि में जब लोकतंत्र के सिपाही ही सुस्त पड़ जाएं, तो जीत-हार से ज़्यादा सवाल मतदान प्रतिशत पर उठते हैं। पटना विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जहां मतदाताओं का उत्साह बीते साल से कमतर नज़र आया।
पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव: इस बार क्यों घटी छात्रों की मतदान में रुचि, जानिए पूरा विश्लेषण
पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव: कम वोटिंग ने बढ़ाए सवाल
बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक पटना विश्वविद्यालय में शनिवार, 28 फरवरी को हुए छात्रसंघ चुनाव में मतदान का प्रतिशत उम्मीद से काफी नीचे रहा। इस बार कुल 37.84 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई, जो पिछले साल के मुकाबले काफी कम है। इस कम मतदान प्रतिशत ने न केवल चुनाव परिणाम को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है, बल्कि कई अहम सवालों को भी जन्म दिया है कि आखिर छात्रों में मतदान के प्रति यह उदासीनता क्यों है? यह देखना दिलचस्प होगा कि इस कम मतदान के बावजूद कौन सी छात्र इकाई बाजी मारती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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घटते मतदान प्रतिशत के पीछे क्या हैं कारण?
चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि कम मतदान प्रतिशत के पीछे कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें छात्रों के बीच जागरूकता की कमी, परीक्षा का दबाव, या फिर प्रत्याशियों को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण का अभाव शामिल हो सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र नेताओं को इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। पिछले कुछ वर्षों से छात्रसंघ चुनाव में छात्रों की भागीदारी घटती जा रही है, जो एक स्वस्थ छात्र राजनीति के लिए शुभ संकेत नहीं है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं, जो जल्द ही शुरू होगी। छात्र संगठनों के नेताओं और प्रत्याशियों में अपने-अपने जीत के दावे किए जा रहे हैं। देखना होगा कि यह कम मतदान प्रतिशत किसके पक्ष में जाता है और कौन सी छात्र इकाई छात्रों की अगुवाई का मौका पाती है। यह चुनाव परिणाम बिहार की छात्र राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


