

Madhubani News: कानून के लंबे हाथों ने एक बार फिर अपना काम कर दिखाया है और एक गुनहगार को उसके अंजाम तक पहुंचा दिया है। मधुबनी की एक अदालत ने नाबालिग से बलात्कार के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
Madhubani News: मधुबनी में इंसाफ की जीत! नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी मोहम्मद सालिम को 10 साल की कठोर सजा, कोर्ट ने ठोका जुर्माना
बिहार के मधुबनी जिले से न्याय की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-VI की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बलात्कार के आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 वर्षों के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला नगर थाना कांड संख्या-317/21 से जुड़े मामले में आया है, जिसमें अभियोजन पक्ष की दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी मोहम्मद सालिम उर्फ अल्ला रक्खा को उसके किए की सजा मिली। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Madhubani News: क्या है पूरा मामला और किसने की अभियोजन की पैरवी- Advertisement -
मामला साल 2021 का है, जब मधुबनी नगर थाना क्षेत्र के महाराज अंबेडकर पोखर निवासी मोहम्मद अंसारी के बेटे मोहम्मद सालिम उर्फ अल्ला रक्खा पर एक नाबालिग को अगवा कर उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगा था। पुलिस ने इस संबंध में कांड संख्या-317/21 दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत इकट्ठा किए। पुलिस के बेहतरीन अनुसंधान और प्रभावी अभियोजन के कारण ही यह न्यायालय का फैसला संभव हो पाया है। इस केस में सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्री खुर्शीद आलम ने मजबूती से पक्ष रखा।
उनकी दलीलों और प्रस्तुत किए गए सबूतों को ध्यान में रखते हुए माननीय न्यायालय ने आरोपी को दो अलग-अलग धाराओं में दोषी पाया। अदालत ने मोहम्मद सालिम को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा-363 (अपहरण) के तहत 3 साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही, मुख्य आरोप, यानी धारा-376 (बलात्कार) के तहत उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10,000 रुपये के आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
समाज में जाएगा कड़ा संदेश- Advertisement -
अदालत के इस फैसले का समाज में स्वागत किया जा रहा है। इस तरह के कठोर निर्णय आपराधिक मानसिकता वाले लोगों के मन में कानून का भय पैदा करने का काम करते हैं। यह फैसला उन सभी पीड़ितों के लिए भी एक उम्मीद की किरण है जो न्याय की आस में अदालतों के चक्कर लगाते हैं। प्रभावी पुलिसिंग और मजबूत न्यायिक प्रक्रिया के समन्वय से ही समाज में अपराध पर लगाम लगाई जा सकती है। इस तरह का न्यायालय का फैसला समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है और न्याय व्यवस्था में आम लोगों के विश्वास को और मजबूत करता है।

