

Holika Dahan 2026: फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन का पावन पर्व मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह अग्निदेव की आराधना का विशेष दिन है, जब भक्त अपने जीवन से समस्त बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा को भस्म कर समृद्धि एवं सुख-शांति की कामना करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय अत्यंत फलदायी माने जाते हैं, जो पूरे वर्ष आपके घर में सकारात्मकता और खुशहाली का संचार करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Holika Dahan 2026: ये 5 विशेष उपाय दिलाएंगे आपको सुख-समृद्धि
Holika Dahan 2026 के शुभ अवसर पर अपनाएं ये चमत्कारी उपाय
होलिका दहन केवल अग्नि प्रज्ज्वलन का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों और समस्त कष्टों को अग्नि में समर्पित करने का भी शुभ अवसर है। इस दिन किए गए कुछ सरल किंतु प्रभावी ज्योतिषीय उपाय आपके जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता ला सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही पांच पारंपरिक उपाय:
- **होली की अग्नि में अर्पित करें आहुति:** होलिका दहन के पावन अवसर पर अग्नि में एक सूखा नारियल, गेहूं की बालें, और काले तिल की आहुति दें। यह आपके घर से सभी प्रकार के वास्तु दोष, ग्रहों के अशुभ प्रभाव और नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर धन आगमन के मार्ग प्रशस्त करता है।
- **काले धागे का विशेष उपाय:** अपने परिवार के सदस्य (या स्वयं) के सिर से पैर तक एक काला धागा सात बार उतार कर उसे होलिका की प्रज्ज्वलित अग्नि में डाल दें। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह उपाय बुरी नजर, तंत्र-मंत्र और अन्य अनिष्टकारी शक्तियों से रक्षा करता है, जिससे जीवन में शांति बनी रहती है।
- **होलिका की पवित्र राख का महत्व:** होलिका दहन के बाद जब अग्नि शांत हो जाए, तब उसकी थोड़ी सी पवित्र राख अपने घर ले आएं। इस राख को एक स्वच्छ लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी, धन स्थान या पूजा स्थल पर रखें। माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और आर्थिक संपन्नता आती है।
- **मंत्र जाप और परिक्रमा से मनोकामना पूर्ति:** होलिका की अग्नि की कम से कम सात परिक्रमा करते हुए अपने मन में किसी भी बाधा से मुक्ति या मनोकामना पूर्ति के लिए सच्चे हृदय से संकल्प लें। इस दौरान आप ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप भी कर सकते हैं। यह उपाय मानसिक शांति प्रदान करता है और इच्छाओं की पूर्ति में सहायक होता है।
- **चंद्रमा को अर्घ्य देने का विधान:** होलिका दहन की रात्रि में चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके लिए एक तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें थोड़ा दूध, चावल और सफेद पुष्प मिलाकर चंद्रमा को अर्पित करें। इस उपाय से मन को शीतलता मिलती है, मानसिक तनाव कम होता है और रिश्तों में मधुरता आती है।
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होलिका दहन 2026 शुभ मुहूर्त (ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित)
सनातन धर्म के पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में होलिका दहन के लिए अनुमानित शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेगा:
| पर्व | तिथि | शुभ मुहूर्त |
|---|---|---|
| होलिका दहन | शुक्रवार, 13 मार्च 2026 | शाम 06:30 बजे से रात 08:30 बजे तक |
| पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | 12 मार्च 2026 | शाम 06:20 बजे |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 13 मार्च 2026 | शाम 07:45 बजे |
यह मुहूर्त सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांतों पर आधारित है और स्थानीय पंचांग भेद के कारण इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है।
होलिका दहन की कथा भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका से जुड़ी है, जो यह दर्शाती है कि भक्ति और सत्य की हमेशा विजय होती है। होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ गई, परंतु भगवान की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहे और होलिका स्वयं भस्म हो गई। यह पर्व हमें असत्य पर सत्य की और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देता है।
इन उपायों को सच्चे मन और श्रद्धा भाव से करने पर निश्चित रूप से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे।
पवित्र मंत्र जाप:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
निष्कर्ष और उपसंहार:
होलिका दहन का यह पावन पर्व हमें केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं देता, बल्कि अपने जीवन को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा से भरने का भी संदेश देता है। उपरोक्त उपायों को अपनाकर आप अपने घर-परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और आरोग्य का वास सुनिश्चित कर सकते हैं। होलिका की अग्नि में अपने सभी दुखों और बाधाओं को भस्म कर एक नए, उल्लासपूर्ण वर्ष का स्वागत करें। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

