back to top
⮜ शहर चुनें
मार्च, 4, 2026
spot_img

Bihar Liquor Ban: बिहार में शराबबंदी पर फिर तेज हुई सियासी जंग, जेडीयू नेता ने उठाए सवाल!

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
- Advertisement - Advertisement

Bihar Liquor Ban: बिहार में शराबबंदी का मुद्दा एक बार फिर सियासी गलियारों में सुराही की तरह छलक उठा है, जिसने सरकार और विपक्ष दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सत्ताधारी खेमे के एक बड़े नेता के बयान ने इस तपती बहस में जैसे आग में घी डाल दिया है।

- Advertisement -

Bihar Liquor Ban: देवेश चंद्र ठाकुर के बयान ने छेड़ी नई बहस

जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता और सीतामढ़ी से लोकसभा सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान राज्य में शराबबंदी नीति पर अपनी बेबाक राय रखी, जिसने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है। ठाकुर ने साफ तौर पर कहा कि शराबबंदी के बावजूद राज्य में शराब आसानी से उपलब्ध है और यह सिर्फ ‘उपचार’ नहीं बल्कि ‘बीमारी’ है। उनके इस बयान ने न केवल विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का मौका दिया है, बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी मंथन शुरू हो गया है। इस बयान के बाद, यह सवाल उठने लगा है कि क्या नीतीश कुमार सरकार अपनी इस महत्वाकांक्षी नीति पर पुनर्विचार करेगी।

- Advertisement -

ठाकुर ने अपने बयान में शराबबंदी के कार्यान्वयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग शराब पीना चाहते हैं, वे इसे आसानी से प्राप्त कर रहे हैं, जिससे अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह नीति राजस्व के भारी नुकसान का कारण बन रही है, जिसे शिक्षा या स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगाया जा सकता था। उनके इस बयान को, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।, जदयू के भीतर से शराबबंदी पर पहली इतनी मुखर असहमति के रूप में देखा जा रहा है।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  Bihar News: Nitish का मास्टरस्ट्रोक! 725 नए बाजार और हाट से बदलेगी किसानों की किस्मत, जानें कब शुरू होगा काम

शराबबंदी के आर्थिक और सामाजिक पहलू

बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना था, खासकर महिलाओं और परिवारों के लिए। हालांकि, इसके समर्थक और आलोचक दोनों हैं। जहां एक ओर सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण और अपराध में कमी से जोड़ती है, वहीं दूसरी ओर इसके आलोचक अवैध शराब के धंधे, जहरीली शराब से होने वाली मौतों और पुलिस-प्रशासन पर बढ़ते बोझ जैसे मुद्दों को उठाते रहे हैं। देवेश चंद्र ठाकुर के बयान ने इन पुरानी बहसों को एक नया आयाम दिया है, खासकर जब सत्ता पक्ष का एक वरिष्ठ नेता ही अपनी सरकार की नीति पर सवाल उठा रहा हो। यह बिहार की राजनीतिक दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है।

आर्थिक मोर्चे पर भी शराबबंदी ने राज्य को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। एक अनुमान के अनुसार, राज्य को प्रति वर्ष हजारों करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हो रहा है। इसके साथ ही, इस नीति के चलते न्यायिक प्रणाली पर भी अनावश्यक बोझ बढ़ा है, क्योंकि शराब से जुड़े मामलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। ऐसे में, नीतीश कुमार सरकार के सामने यह एक बड़ी चुनौती है कि वह कैसे इस नीति को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देती है और क्या इसमें कोई बदलाव किया जाता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

यह देखना दिलचस्प होगा कि जदयू आलाकमान और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्या वे ठाकुर के बयान को व्यक्तिगत राय मानकर खारिज कर देंगे, या फिर यह शराबबंदी नीति की व्यापक समीक्षा का मार्ग प्रशस्त करेगा? इस मुद्दे पर राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस जारी है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।, और आने वाले समय में इसके और गहरे राजनीतिक निहितार्थ देखने को मिल सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

Toxic Release Date: यश की ‘टॉक्सिक’ की रिलीज डेट टली, अब मार्च नहीं इस महीने पर्दे पर आएगी फिल्म

Toxic Release Date: फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन अप्स' का इंतजार कर रहे...

Gold Price Today: सोने और चांदी में ऐतिहासिक उछाल, जानें आज के ताजा रेट और बाजार का रुख

Gold Price Today: बीते दिन की चौंकाने वाली गिरावट के बाद, बुधवार, 4 मार्च...

आधुनिक फीचर्स से लैस टॉप Bikes Under 2 Lakh: जानें क्या हैं आपके लिए बेस्ट ऑप्शंस!

Bikes Under 2 Lakh: क्या आप 2 लाख रुपये से कम के बजट में...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें