

बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज है। यह वह धधकती आग है जिस पर पानी की उम्मीद में लोग दशकों से बैठे हैं, पर अब खुद घर के चिराग ही इस पर सवाल उठा रहे हैं।
बिहार Liquor Ban: गठबंधन के भीतर से ही उठने लगी आवाज
नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल सहयोगी दलों के नेताओं द्वारा शराबबंदी को खत्म करने की मांग के बाद, अब खुद जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने भी इस नीति को समाप्त करने की वकालत की है। केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी लंबे समय से इस कानून की नाकामी पर मुखर रहे हैं और इसे रद्द करने की सिफारिश करते रहे हैं।
पिछले महीने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के विधायक दल के नेता माधव आनंद ने भी शराब पर प्रतिबंध हटाने की मांग उठाई थी। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और बीजेपी के विधायक विनय बिहारी ने भी शराबबंदी की समीक्षा की आवश्यकता बताई है। अब जेडीयू के ही सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने साफ तौर पर कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भले ही अच्छे मकसद से शराब बंद की थी, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो पाया है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सीतामढ़ी के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने एक चैनल से बातचीत में कहा, “शराबबंदी हट जाए तो बहुत अच्छा है। इसके कई कारण हैं। पूरी दुनिया में आज तक कहीं भी यह नीति सफल नहीं हुई है। उनकी (नीतीश कुमार) इच्छा थी और उनके इरादे बिल्कुल सही थे। उनका मानना था कि इससे लोगों में एक गलत भावना आती है, घरों में मार-पीट होता है, गरीब लोगों के बच्चों की पढ़ाई का पैसा इसमें चला जाता है। यह निश्चित रूप से होता होगा। इसके बावजूद, यह शराबबंदी कानून व्यावहारिक नहीं है। यह संभव नहीं हो सकता। अभी भी शराब आसानी से मिल रही है।”
पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी और शपथ विवाद
ठाकुर ने उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों का नाम लेते हुए कहा कि सीमाएं खुली हुई हैं, जहां से शराब गाड़ियों और ट्रकों में भरकर बिहार आ रही है। उन्होंने जोर दिया कि व्यवहारिक रूप से यह संभव ही नहीं है कि बिहार में शराब पूरी तरह से बंद हो सके। उन्होंने विधानमंडल में विधायकों और विधान पार्षदों द्वारा शराब नहीं पीने की शपथ का भी जिक्र किया और बताया कि वे उस शपथ समारोह में शामिल नहीं हुए थे।
ठाकुर ने बताया कि जब मुख्यमंत्री को पता चला तो उन्होंने उन्हें बुलाकर पूछा कि वे शपथ के समय क्यों गायब थे। ठाकुर ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि वे बिहार में शराब का सेवन नहीं करेंगे, लेकिन बाहर पीने में क्या दिक्कत है। नीतीश कुमार ने शराबबंदी कानून बनाने के बाद सदन में सभी विधायकों और विधान पार्षदों को शपथ दिलाई थी कि वे शराब का सेवन नहीं करेंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
लाखों मामले, गिरफ्तारियां और राजस्व का भारी नुकसान
बिहार में 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद से इसके उल्लंघन के 10 लाख से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। 16 लाख से अधिक लोग गिरफ्तार हुए हैं और 4.50 करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है। इसके बावजूद, शराब की बिक्री शहर से लेकर गांव तक बेरोकटोक जारी है। राज्य सरकार को अनुमानित तौर पर इससे 30-40 हजार करोड़ रुपये के राजस्व की हानि हो रही है, लेकिन प्रशासन और पुलिस से मिलीभगत कर तस्करों ने इससे भी बड़ा अवैध व्यापार खड़ा कर लिया है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। स्थानीय स्तर पर स्पिरिट से शराब बनाने की कोशिश में जहरीली शराब अब तक कई दर्जन लोगों की जान ले चुकी है, यह इस शराबबंदी कानून की एक गंभीर विफलता है।
विधानसभा में जब रालोमो विधायक माधव आनंद ने शराबबंदी की समीक्षा की मांग की थी, तो सरकार की तरफ से मंत्री विजय चौधरी ने स्पष्ट किया था कि ऐसा कोई विचार नहीं होगा। हालांकि, गठबंधन के भीतर से ही उठ रही लगातार मांगों को देखते हुए, नीतीश सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।




