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मार्च, 2, 2026
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Patna NEET Case: पटना नीट छात्रा मौत मामले में हॉस्टल मालिक को नहीं मिली राहत, CBI-SIT पर कोर्ट सख्त

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Patna NEET Case: न्यायिक पेंच में उलझी एक और जिंदगी का सवाल, जहां न्याय की डगर पर अब भी इंतजार की धूल जमी है। पटना में एक नीट छात्रा की मौत का मामला फिर से सुर्खियों में है, और इस बार भी सवाल वही हैं – इंसाफ कब?

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Patna NEET Case: क्या कहते हैं हॉस्टल मालिक मनीष रंजन के वकील?

पटना नीट छात्रा मौत मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को फिलहाल कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। उनकी जमानत याचिका पर लंबी सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सीबीआई और एसआईटी दोनों जांच एजेंसियों से कई तीखे सवाल पूछे। यह छात्र मौत मामला बिहार की राजधानी में कई दिनों से चर्चा का विषय बना हुआ है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।, और हर कोई न्याय का इंतजार कर रहा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की गई है। मनीष रंजन की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच की धीमी गति और सीबीआई के रुख पर सवाल उठाए।

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कोर्ट ने जानना चाहा कि जब सीबीआई का कहना है कि उन्हें हॉस्टल मालिक की जांच में फिलहाल आवश्यकता नहीं है, तो फिर उनकी गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत क्यों जारी है। इस छात्र मौत मामला में सीबीआई ने अपने बयान में कहा कि उन्हें जांच के लिए हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद, कोर्ट ने दोनों जांच एजेंसियों से और स्पष्टीकरण मांगा है, जिससे पता चलता है कि मामला अभी भी कई अनसुलझे पहलुओं से घिरा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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जांच एजेंसियों के सामने चुनौतियां और अगली सुनवाई

न्यायालय के कड़े सवालों के बाद, सीबीआई और एसआईटी पर अब यह दबाव है कि वे इस मामले में अपनी जांच को और पुख्ता करें। मनीष रंजन के वकीलों ने अपनी दलीलों में जमानत का पुरजोर समर्थन किया, यह तर्क देते हुए कि जब जांच एजेंसी को उनके मुवक्किल की आवश्यकता नहीं है, तो उन्हें हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद, अगली सुनवाई तक जमानत पर फैसला टाल दिया। इस फैसले से पीड़ित परिवार को एक ओर जहां न्याय की उम्मीद बंधी है, वहीं मनीष रंजन के लिए कानूनी लड़ाई और लंबी खिंच गई है। यह मामला पटना में कानून व्यवस्था और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सभी की निगाहें अब 11 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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