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मार्च, 2, 2026
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Holika Dahan: ग्रह दोषों से मुक्ति का पवित्र पर्व

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Holika Dahan: फाल्गुन पूर्णिमा का पावन अवसर हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और अग्नि के शुद्धिकरण शक्ति को दर्शाता है। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक की गई Holika Dahan की परिक्रमा जीवन की नकारात्मकता और विभिन्न ग्रह दोषों के प्रभावों को कम करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होती है। इस पवित्र अग्नि में समस्त कष्टों को भस्म कर जीवन में सुख-शांति लाने का यह एक अद्भुत अवसर है।

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Holika Dahan: ग्रह दोषों से मुक्ति का पवित्र पर्व

Holika Dahan पर करें ये विशेष उपाय, दूर होंगे ग्रह दोष

होलिका दहन की पावन अग्नि न केवल दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का शमन करती है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में व्याप्त अदृश्य ग्रह दोषों के नकारात्मक प्रभावों को भी दूर करने में सक्षम है। जब भक्त पूर्ण निष्ठा और विधि-विधान के साथ इस अग्नि की परिक्रमा करते हैं, तो उन्हें दैवीय कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह समय अपने आप को शुद्ध करने और नव वर्ष के आगमन से पूर्व सभी बाधाओं को दूर करने का होता है।

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होलिका दहन की परिक्रमा का सही विधि और प्रभाव

होलिका दहन के शुभ अवसर पर किए जाने वाले कुछ सरल उपाय आपके जीवन से नकारात्मकता और ग्रह दोषों को दूर कर सकते हैं:

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  • परिक्रमा की संख्या: होलिका दहन की अग्नि की कम से कम 3, 5, 7, 11 या 21 परिक्रमा करने का विधान है। परिक्रमा करते समय अपने मन में “ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं होलिका देव्यै नमः” मंत्र का जाप कर सकते हैं या अपनी इच्छाओं और कष्टों को मन ही मन अग्निदेव से कह सकते हैं।
  • आहुति सामग्री: परिक्रमा के दौरान सूखे नारियल, गुड़, गेहूं की बाली, सरसों, काले तिल और एक पान का पत्ता लेकर अग्नि में अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह सामग्री नकारात्मक ऊर्जा को सोख कर अग्नि में भस्म कर देती है।
  • प्रार्थना और समर्पण: परिक्रमा के पश्चात अग्नि को प्रणाम करें और अपने जीवन से सभी प्रकार के कष्टों, बीमारियों और ग्रह दोषों को दूर करने की प्रार्थना करें। अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ समर्पण का भाव रखें।
यह भी पढ़ें:  होलिका दहन 2026: पावन पर्व और शुभकामनाओं का विशेष महत्व... पढ़िए

होलिका दहन की पौराणिक कथा भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका से जुड़ी है। होलिका को अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था, परंतु जब वह प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठी, तो भगवान की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहे और होलिका स्वयं भस्म हो गई। यह कथा धर्म की विजय और अधर्म के नाश का प्रतीक है। यही कारण है कि इस अग्नि को अत्यंत पवित्र और पापों का नाश करने वाली माना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

होलिका दहन की अग्नि के समक्ष इस मंत्र का जाप करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं:

सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः।।

निष्कर्ष और सरल उपाय

होलिका दहन का यह पर्व हमें यह सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और धर्म के मार्ग पर चलने वाले भक्तों की रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं। यदि आप किसी विशेष ग्रह दोष से पीड़ित हैं या जीवन में लगातार समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो होलिका दहन के दिन पूरी निष्ठा के साथ ऊपर बताए गए उपायों को अपनाएं। अग्निदेव की कृपा से आपके जीवन में अवश्य ही सकारात्मक परिवर्तन आएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अधिक जानकारी और धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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