
Lunar Eclipse 2026: फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर होने वाला यह चंद्र ग्रहण खगोल विज्ञान और भारतीय ज्योतिष दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। विशेष रूप से यह खंडग्रास चंद्र ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में घटित हो रहा है, जो इसके प्रभावों को और भी गहरा बनाता है। माना जा रहा है कि इसका सीधा असर सभी राशियों और देश-दुनिया पर पड़ेगा, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Lunar Eclipse 2026: जानें क्या कहता है ज्योतिषीय विश्लेषण?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में पड़ने वाला यह ग्रहण विभिन्न राशियों के जातकों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालेगा। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस अवधि में कुछ विशेष उपायों का पालन किया जाना चाहिए ताकि ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सके और शुभ फल प्राप्त हो सकें। यह समय आत्म-चिंतन और साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
ग्रहण का सूतक काल सुबह 8:50 बजे से शुरू हो जाएगा, जो ग्रहण की समाप्ति तक मान्य रहेगा। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और कोई भी शुभ कार्य वर्जित माना जाता है। इसी अवधि में, चंद्रग्रहण का समय भी अपने चरम पर होगा, जिससे धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य का महत्व बढ़ जाता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
सूतक काल के दौरान क्या करें और क्या न करें?
सूतक काल को एक संवेदनशील अवधि माना जाता है। इस दौरान भोजन बनाने और खाने से बचना चाहिए, हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों के लिए इसमें छूट दी जाती है। ग्रहण से पहले तुलसी के पत्ते को खाद्य पदार्थों में डालना शुभ माना जाता है। ग्रहण के समय मूर्ति स्पर्श न करें और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना फलदायी होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर घर को शुद्ध करना चाहिए और दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए। यह खगोलीय घटना हमें प्रकृति के नियमों और उसके प्रति हमारी जिम्मेदारी की याद दिलाती है।







