
Chandra Grahan 2026: ब्रह्मांड की अलौकिक घटनाओं में चंद्र ग्रहण का अपना विशेष महत्व है, जो ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टि से गहन प्रभाव डालता है।
Chandra Grahan 2026: फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण, जानें मंदिरों के खुलने का समय
Chandra Grahan 2026 और सूतक काल के नियम
इस वर्ष 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के पावन अवसर पर Chandra Grahan 2026 का अदभुत नजारा देखने को मिलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल एक संवेदनशील समय होता है, जब शुभ कार्यों से बचना चाहिए। इस खगोलीय घटना का प्रभाव न केवल प्रकृति पर, बल्कि मानव जीवन पर भी पड़ता है। ग्रहण के सूतक काल के कारण, भारतवर्ष के प्रमुख मंदिरों के कपाट प्रातःकाल में श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ग्रहण की समाप्ति के उपरांत, शुद्धिकरण और पूजा-अर्चना के पश्चात, संध्याकाल में मंदिरों के द्वार एक बार पुनः भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। यह एक ऐसा क्षण है जब भक्तगण विशेष प्रार्थनाएं और उपाय करते हैं।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से नौ घंटे पूर्व आरंभ हो जाता है। सूतक काल में मूर्तियों का स्पर्श वर्जित माना गया है, और इसी कारणवश इस अवधि में मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं। ग्रहण समाप्ति के पश्चात ही मंदिरों का शुद्धिकरण किया जाता है, जिसके बाद ही पुनः पूजा-पाठ और दर्शन की अनुमति होती है। यह अवधि ग्रहण काल में विशेष मंत्रों के जाप और ध्यान के लिए उत्तम मानी जाती है।
ग्रहण के दौरान और उसके बाद कुछ विशेष उपाय करने से नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और गरीबों को दान अवश्य दें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप ग्रहण काल में अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस समय की गई प्रार्थनाएँ और दान-पुण्य विशेष महत्व रखते हैं। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें








