
PMCH Doctors FIR: धरती के भगवान जब राक्षसी प्रवृत्ति अख्तियार कर लें, तो मरीजों का क्या होगा? बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां मरीजों के परिजन खून से लथपथ होकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
PMCH Doctors FIR: क्या है पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों पर दर्ज प्राथमिकी का पूरा मामला?
बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पीटल (पीएमसीएच) में एक बार फिर डॉक्टरों की बर्बरता सामने आई है। मरीज के परिजनों की दौड़ा-दौड़ाकर पिटाई करने, मोबाइल छीनने और नशे में धुत होने के गंभीर आरोपों में 35 जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ पटना के पीरबहोर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई मंत्री संजय सिंह के हस्तक्षेप के बाद हुई है। हालांकि, सभी आरोपी डॉक्टर अज्ञात हैं। मंत्री ने सीसीटीवी फुटेज खंगालकर सभी आरोपियों की पहचान कर उन्हें तत्काल गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब पीएमसीएच में इस तरह की अस्पताल हिंसा की घटना सामने आई है। इससे पहले चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप पर भी पीएमसीएच में जानलेवा हमला किया गया था, जिसके बाद उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था। ताजा मामले में, पिटाई से घायल हुए मरीजों का अस्पताल में इलाज तक नहीं किया गया। उन्हें अपनी जान बचाकर एक निजी अस्पताल में जाकर इलाज कराना पड़ा।
पीड़ितों की शिकायत मिलने पर लोजपा आरवी के मंत्री संजय सिंह खुद अस्पताल पहुंचे। घायलों ने उन्हें बताया कि पहले अस्पताल के सुरक्षा गार्डों और फिर डॉक्टरों ने मिलकर उन्हें खदेड़-खदेड़ कर पीटा। आरोप है कि डॉक्टर यह भी कह रहे थे कि ‘मनीष कश्यप का इलाज कर दिए थे, वह वाकया भूल गए हो?’ कई पीड़ितों के सिर फूट गए थे। मंत्री संजय सिंह ने घटनास्थल से ही पुलिस पदाधिकारियों को फोन लगाया। कई प्रयासों के बाद जब एक अधिकारी ने फोन उठाया, तो मंत्री ने उन्हें जमकर फटकार लगाई।
पीएमसीएच में डॉक्टरों का आतंक: मंत्री संजय सिंह का पुलिस को निर्देश
मंत्री संजय सिंह ने आक्रोशित होकर कहा कि पीएमसीएच में डॉक्टरों का ‘आतंक’ बढ़ता जा रहा है। उन्होंने पुलिस अधिकारी से पूछा कि ‘अस्पताल के गार्ड परिजनों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटते हैं। पीएमसीएच में इतनी बड़ी घटना हो गई, क्या आपको इसकी जानकारी है? किसी का सिर फूटा है, चेहरा जख्मी है, किसी का हाथ टूटा है।’ उन्होंने यह भी बताया कि मौके पर 112 नंबर की पुलिस मौजूद थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोपियों ने पीड़ितों का मोबाइल फोन भी छीन लिया था। मंत्री ने पुलिस पदाधिकारी को निर्देश दिया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान की जाए और छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
क्या था पूरा मामला?
मधुबनी निवासी पीड़ित राहुल मिश्रा ने मंत्री को बताया कि वह और उनके भाई सोनू 2 मार्च को एक ट्रेन यात्रा के दौरान अथमलगोला के पास घायल हो गए थे। बेहतर इलाज के लिए उन्हें बाढ़ अस्पताल से पीएमसीएच रेफर किया गया था। 3 मार्च को जब वे सर्जरी विभाग पहुंचे, तो डॉक्टरों ने उन्हें सीटी स्कैन बाहर से कराने को कहा। जब राहुल ने डॉक्टरों से लिखित में देने की मांग की कि जांच अस्पताल में संभव नहीं है, तो डॉक्टर गुस्से में आ गए और गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। राहुल का आरोप है कि जान बचाकर भागने के दौरान जूनियर डॉक्टरों और गार्डों ने उन्हें मरीन ड्राइव की ओर जाने वाले रास्ते पर घेर लिया और बेरहमी से पीटा। राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि मारपीट करने वाले सभी डॉक्टर नशे की हालत में थे। मारपीट के दौरान उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मारपीट से जख्मी लोगों का इलाज भी कहीं नहीं किया जा रहा था और इंजुरी रिपोर्ट देने से भी मना कर दिया गया।







