
Hindi Imposition: राजनीति के अखाड़े में भाषा का दांव एक बार फिर गहरा गया है, जहां दक्षिण की राजनीति का प्रतिनिधित्व कर रहे एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर राज्य में हिंदी थोपने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि ‘एक भाषा, तीन लिपि’ की नीति की आड़ में केंद्र यह काम कर रहा है। स्टालिन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह उच्चारण में मुश्किल हिंदी नामों को अंग्रेजी और तमिल लिपियों में हूबहू लिप्यंतरित कर रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने भाजपा को हिंदी थोपने के इस ‘जुनून’ के खिलाफ सख्त चेतावनी भी दी।
हिंदी थोपना: ‘एक भाषा, तीन लिपि’ नीति पर सवाल
मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “भाजपा सरकार द्वारा हिंदी थोपना: प्रवेश द्वार पर ही उच्चारण में मुश्किल नाम! भाजपा हिंदी थोपने के अपने जुनून में सारी हदें पार कर रही है! केंद्र भाजपा सरकार ने ‘एक भाषा, तीन लिपि’ नीति अपनाकर हिंदी थोपने का घिनौना काम किया है, जहां हिंदी नामों को सीधे तमिल और अंग्रेजी लिपियों में लिप्यंतरित किया जा रहा है!” यह विवाद केंद्र की भाषा नीति पर नए सिरे से बहस छेड़ रहा है।
रेलवे और सरकारी योजनाओं के नामकरण पर आपत्ति
स्टालिन ने हिंदी थोपने के कथित उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि तिरुचिरापल्ली रेलवे मंडल कार्यालय में भाजपा ने ‘कर्तव्य द्वार’ को तीन लिपियों में लिखा है। उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफओ) कार्यालयों के लिए ‘भविष्य निधि भवन’ नाम के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया कि नए आपराधिक कानूनों के लिए भी संस्कृत नामों को अंग्रेजी लिपि में लिखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय का नाम ‘जल शक्ति’ कर दिया गया है और महात्मा गांधी 100-दिवसीय कार्य योजना (मनरेगा) के नाम में बदलाव के मामले में भी यही रवैया अपनाया गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
स्टालिन ने जोर देकर कहा कि भाजपा को करारा सबक सिखाया जाना चाहिए और उनसे हिंदी थोपने के प्रयास को तुरंत छोड़ने को कहा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “उनकी धृष्टता और अहंकार बढ़ता जा रहा है। तमिल जनता के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वालों को करारा सबक सिखाया जाना चाहिए!” उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार तमिल और अंग्रेजी लिपियों के माध्यम से हिंदी थोपने का प्रयास छोड़ दे और तुरंत उचित तमिल नाम वहां अंकित किए जाएं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। स्टालिन ने चेतावनी दी कि “अन्यथा, केंद्र सरकार की भाजपा सरकार को तमिलों के प्रकोप का सामना करना पड़ेगा।”








