
Layoff: दुनिया की दिग्गज वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने हाल ही में एक चौंकाने वाला फैसला लिया है, जहां उसने अपने वर्कफोर्स में 3 प्रतिशत की कटौती का ऐलान किया है।
# मॉर्गन स्टेनली और Layoff: रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद 2500 कर्मचारियों की छंटनी क्यों?
## मॉर्गन स्टेनली में Layoff: 2500 कर्मचारियों पर असर
दुनिया की दिग्गज वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने हाल ही में एक चौंकाने वाला फैसला लिया है, जहां उसने अपने वर्कफोर्स में 3 प्रतिशत की कटौती का ऐलान किया है। यह कटौती लगभग 2500 कर्मचारियों को प्रभावित करेगी। रॉयटर्स न्यूज एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, यह छंटनी मुख्य रूप से इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, ट्रेडिंग, वेल्थ मैनेजमेंट और इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट डिवीजनों में की गई है। हालांकि, फाइनेंशियल एडवाइजर्स पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह कदम कई लोगों के लिए हैरानी का विषय है, खासकर तब जब बैंक ने साल 2025 में रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमाया। इस दौरान बैंक का सालाना रेवेन्यू भी अब तक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया। चौथी तिमाही का प्रॉफिट भी वॉल स्ट्रीट की उम्मीदों से काफी बेहतर रहा, जिससे इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के रेवेन्यू में 47 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई। डीलमेकिंग में तेजी के साथ डेट अंडरराइटिंग फीस भी लगभग दोगुनी हो गई। बैंक ने 2026 में मर्जर और एक्विजिशन के साथ-साथ इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग जैसी बड़ी योजनाओं के साथ एंट्री ली थी, ऐसे में इतनी बड़ी छंटनी का फैसला समझ से परे लगता है।
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## छंटनी के पीछे की असली वजह
सोर्स ने इस पर सफाई देते हुए बताया कि यह नौकरी में कटौती रणनीति और व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर की गई है। बैंक अन्य क्षेत्रों में हायरिंग की भी योजना बना रहा है, जिससे यह साफ होता है कि मॉर्गन स्टेनली अपनी लोकेशन स्ट्रेटेजी में बदलाव कर रहा है। इसके तहत पुराने रोल्स को खत्म करके उन नए क्षेत्रों में कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है, जहां विकास की अधिक संभावनाएं हैं। इसका मतलब है कि इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को छंटनी का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि इसके पीछे कंपनी की संगठनात्मक रणनीति है। दिसंबर के आखिर में मॉर्गन स्टेनली का ग्लोबल वर्कफोर्स 82,992 था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस प्रकार की पुनर्रचना आमतौर पर वित्तीय क्षेत्र में देखी जाती है, जहां कंपनियां अपनी दक्षता और भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से कार्यबल को पुनर्गठित करती हैं।






