
Sheetala Ashtami: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का पावन व्रत रखा जाता है, जो देवी शीतला को समर्पित है। यह दिन स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाता है, जब भक्तगण बासी भोजन ग्रहण कर शीतला माता की कृपा प्राप्त करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
# शीतला अष्टमी 2026: बासोड़ा व्रत का महत्व और पूजन विधि
## शीतला अष्टमी का पौराणिक महत्व और शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष महत्व है। यह पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, जिसे ‘बासोड़ा’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है, जो चेचक, खसरा जैसी बीमारियों से रक्षा करती हैं और अपने भक्तों को निरोगी काया प्रदान करती हैं। मान्यता है कि इस दिन ताज़ा भोजन नहीं बनाया जाता, बल्कि एक दिन पहले बने बासी भोजन को ही प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यह परंपरा स्वच्छता और शीतलता के महत्व को दर्शाती है, साथ ही यह संदेश भी देती है कि हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना चाहिए। यह व्रत विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए रखा जाता है।
**शीतला अष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त**
| विवरण | तिथि/समय (वर्ष 2026) |
| :——————- | :————————– |
| **शीतला अष्टमी तिथि** | शुक्रवार, 20 मार्च 2026 |
| **अष्टमी तिथि प्रारंभ** | 19 मार्च 2026, रात 08:30 बजे से |
| **अष्टमी तिथि समाप्त** | 20 मार्च 2026, शाम 06:00 बजे तक |
| **पूजा का शुभ मुहूर्त** | 20 मार्च 2026, सुबह 06:20 से शाम 06:00 बजे तक |
### शीतला माता पूजन विधि
शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। इस दिन भक्तगण सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करते हैं और माता की पूजा की तैयारी करते हैं। पूजन विधि के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:
* प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* पूजा स्थल को साफ करें और एक चौकी पर माता शीतला की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
* माता को जल, रोली, चावल, पुष्प, वस्त्र आदि अर्पित करें।
* माता को नीम के पत्ते विशेष रूप से अर्पित करें, क्योंकि नीम को शीतला माता का प्रिय माना जाता है और यह रोगों से भी रक्षा करता है।
* एक दिन पहले तैयार किए गए बासी पकवान (दही, चावल, हलवा, पूड़ी आदि) का भोग लगाएं। इसे ही `बासोड़ा` के रूप में ग्रहण किया जाता है।
* शीतला स्तोत्र का पाठ करें और माता की आरती गाएं।
* पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्य बासी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
* व्रत करने वाले व्यक्ति को इस दिन ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए और ठंडे पानी का ही सेवन करना चाहिए।
### शीतला अष्टमी का महत्व और कथा
शीतला अष्टमी का पर्व प्रकृति और स्वास्थ्य के प्रति हमारी श्रद्धा का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता शीतला देवी दुर्गा का ही एक स्वरूप हैं, जो अपने भक्तों को चेचक, खसरा, और अन्य त्वचा संबंधी रोगों से मुक्त करती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन माता शीतला की आराधना करने से न केवल शारीरिक कष्ट दूर होते हैं, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है। इस व्रत से परिवार में सुख-समृद्धि और आरोग्य का वास होता है।
### शीतला माता का मंत्र
शीतला माता की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है:
> ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः।।
### निष्कर्ष और उपाय
शीतला अष्टमी का यह पावन पर्व हमें स्वच्छता, स्वास्थ्य और संयम का संदेश देता है। माता शीतला की कृपा से जीवन में शीतलता और शांति बनी रहती है। इस दिन किए गए दान-पुण्य और व्रत से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। व्रत के दिन किसी गरीब या ज़रूरतमंद को भोजन कराना या वस्त्र दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन से गर्मी का आगमन भी माना जाता है, इसलिए शीतला माता की पूजा से गर्मियों में होने वाले रोगों से भी मुक्ति मिलती है।
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