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मार्च, 6, 2026
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सूर्य ग्रहण 2026: जानें कब लगेगा साल का दूसरा पूर्ण सूर्य ग्रहण और इसका प्रभाव

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Surya Grahan 2026: ज्योतिषीय गणनाओं और खगोलीय घटनाओं के अनुसार, वर्ष 2026 एक महत्वपूर्ण वर्ष सिद्ध होगा, जिसमें कई विशेष योग और ग्रहण का प्रभाव देखने को मिलेगा।

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# सूर्य ग्रहण 2026: जानें कब लगेगा साल का दूसरा पूर्ण सूर्य ग्रहण और इसका प्रभाव

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## सूर्य ग्रहण 2026: भारत में दृश्यता और सूतक का महत्व

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पंचांग गणनाओं के अनुसार, साल 2026 का दूसरा और पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को घटित होगा। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, जिसका ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से गहरा महत्व है। यह ग्रहण पृथ्वी के कई हिस्सों में दिखाई देगा, जबकि भारत में इसका दृश्य प्रभाव नहीं पड़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आइए जानते हैं इस अद्भुत खगोलीय घटना से जुड़ी विस्तृत जानकारी। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

### ग्रहण का समय और भौगोलिक दृश्यता

यह पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार देर रात में लगेगा, जिससे यह भारत में अदृश्य रहेगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के बड़े हिस्से में इसे आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में देखा जा सकेगा।

### भारत पर ग्रहण का प्रभाव और सूतक विचार

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चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारतीय उपमहाद्वीप में सूतक काल के नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल तभी प्रभावी होता है जब ग्रहण किसी विशेष क्षेत्र में दृश्यमान हो। सामान्यतः, सूतक काल को अशुभ अवधि माना जाता है, जिसमें शुभ कार्यों, भोजन पकाने या ग्रहण करने, और देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श करने से परहेज किया जाता है।

### सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

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यद्यपि भारत में सूतक प्रभावी नहीं होगा, फिर भी ग्रहण के सामान्य नियमों की जानकारी रखना उचित है।

* **क्या करें:**
* ग्रहण काल में ईश्वर का स्मरण, मंत्र जप और ध्यान करना शुभ माना जाता है।
* ग्रहण समाप्त होने पर स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
* ग्रहण के बाद अन्न, वस्त्र और धन का दान करना पुण्यकारी होता है।
* गंगाजल का छिड़काव कर घर को शुद्ध करें।
* **क्या न करें:**
* ग्रहण काल में भोजन पकाना या खाना वर्जित माना जाता है।
* गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
* धारदार वस्तुओं का उपयोग न करें।
* शुभ कार्य प्रारंभ करने से बचें।

आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जो हमें ब्रह्मांड की विशालता का अनुभव कराती है।

### ग्रहण के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक पहलू

सूर्य ग्रहण एक ऐसी खगोलीय घटना है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, जिससे पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश अवरुद्ध हो जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इसे राहु और केतु से संबंधित माना गया है, जहां राहु सूर्य को ग्रसने का प्रयास करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक नियमित खगोलीय प्रक्रिया है, जबकि आध्यात्मिक दृष्टि से इसे जप, तप और दान के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

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### सूर्य ग्रहण के उपरांत के उपाय

ग्रहण समाप्त होने पर पवित्र नदियों में स्नान करने या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करने का विधान है। इसके बाद अपनी श्रद्धा अनुसार किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान अवश्य करें। इस समय भगवान सूर्यदेव के मंत्रों का जप विशेष फलदायी होता है।

> ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्

आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह ग्रहण भले ही भारत में दृश्य न हो, पर इसकी जानकारी हमें खगोलीय गतिविधियों और ज्योतिषीय महत्व को समझने में मदद करती है।

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