
Gas Market: खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आपके रसोईघर तक पहुंच सकता है। दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक Strait of Hormuz में किसी भी बाधा की आशंका ने वैश्विक गैस बाजार में हलचल बढ़ा दी है। एलएनजी शिपमेंट पर संभावित प्रभाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों पर दबाव बन रहा है, जिससे आने वाले समय में एलएनजी महंगी हो सकती है और इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
खाड़ी में बढ़ते तनाव से गरमाया Gas Market: एलएनजी की कीमतें बढ़ने की आशंका
Gas Market में हलचल और भारत पर असर
तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाली पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) और वाहनों में उपयोग होने वाली सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में, यदि एलएनजी की वैश्विक आपूर्ति बाधित होती है, तो इसका सीधा असर इन ईंधनों की कीमतों पर पड़ना तय है। Strait of Hormuz रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। इसके अलावा, दुनिया के कुल एलएनजी व्यापार का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। इस संकरे समुद्री रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजार को गंभीर झटका दे सकती है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ना तय है। कोटक सिक्योरिटीज के फंडामेंटल रिसर्च के वाइस प्रेसिडेंट सुमित पोखरना बताते हैं कि एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं, तो दूसरी ओर ईरान, जिसके कारण क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। इस स्थिति में क्षेत्रीय ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है।
**पश्चिम एशिया में गहराता तनाव**
इस बीच, ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने चेतावनी दी है कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। इससे इस अहम कॉरिडोर के जरिए ऊर्जा आपूर्ति रुकने की आशंका और बढ़ गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग का लंबे समय तक बंद रहना मुश्किल है, लेकिन यदि यह कुछ हफ्तों के लिए भी प्रभावित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
भारत के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक है, क्योंकि देश को मिलने वाले लगभग 50 से 55 प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। ऐसे में, अगर यह ट्रांजिट रूट लंबे समय तक बाधित रहता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। भारत एलएनजी के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है। एस एंड पी ग्लोबल के आंकड़ों के मुताबिक, कतर और यूएई से भारत को कुल एलएनजी आपूर्ति का लगभग 59 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। यह निर्भरता मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में भारत के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







