
ईरान-इजरायल युद्ध: मिडिल ईस्ट में पनपा भू-राजनीतिक तनाव अब भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर दिखा रहा है। इस युद्ध के कारण कच्चे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी उथल-पुथल मची है, जिसका खामियाजा भारतीय उर्वरक उद्योग को भुगतना पड़ रहा है। देश की प्रमुख उर्वरक कंपनियां, विशेषकर यूरिया उत्पादक, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की कमी के चलते अपने उत्पादन में कटौती करने पर मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल कृषि क्षेत्र के लिए चिंताजनक है, बल्कि वैश्विक कमोडिटी बाजारों में भी हलचल पैदा कर रही है।
ईरान-इजरायल युद्ध का गहराता साया: भारत में यूरिया उत्पादन पर संकट, बढ़ सकती हैं कीमतें
ईरान-इजरायल युद्ध: भारतीय उर्वरक उद्योग पर सीधा असर
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता और ईरान-इजरायल युद्ध के कारण भारत में उर्वरक उत्पादन करने वाली कंपनियों को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नाम न छापने की शर्त पर मामले से जुड़े लोगों ने बताया है कि इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) जैसी कुछ प्रमुख कंपनियों ने अपने यूरिया संयंत्रों में उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति में लंबी रुकावट की आशंका इन कंपनियों को अपनी उत्पादन सुविधाओं को बंद करने के लिए भी मजबूर कर सकती है। यह स्थिति कृषि क्षेत्र में एक संभावित खाद संकट की ओर इशारा करती है।
यूरिया के उत्पादन में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। LNG का उपयोग न केवल यूरिया के निर्माण में एक प्रमुख कच्चे माल के रूप में होता है, बल्कि भारी मशीनों को चलाने के लिए ईंधन के तौर पर भी इसकी आवश्यकता होती है। कतर के रास लफान (Ras Laffan) संयंत्र पर कथित ईरानी हमले के बाद ‘फोर्स मेज्योर’ की घोषणा ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ‘फोर्स मेज्योर’ एक कानूनी प्रावधान है जो उन असाधारण परिस्थितियों को संदर्भित करता है जिन पर मानव नियंत्रण नहीं होता, जैसे कि युद्ध या प्राकृतिक आपदा। इस घोषणा का अर्थ है कि प्रभावित कंपनियां मौजूदा हालातों के कारण अपने अनुबंधों को पूरा करने में असमर्थ होंगी और आपूर्ति न दे पाने पर उन पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।
भारत अपनी कुल LNG आवश्यकता का लगभग 40-45 प्रतिशत हिस्सा कतर से आयात करता है, और देश में लगभग 80 प्रतिशत यूरिया का उत्पादन LNG पर निर्भर है। ऐसे में कतर से आपूर्ति में किसी भी तरह की कमी का सीधा असर भारत के यूरिया उत्पादन पर पड़ता है, जिससे कमोडिटी बाजार में कीमतें बढ़ने लगती हैं और व्यापक आर्थिक चिंताएं पैदा होती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ब्लूमबर्ग द्वारा प्राप्त कंपनी के नोटिस के अनुसार, पाकिस्तान की सुई नॉर्दर्न गैस पाइपलाइन्स लिमिटेड ने भी अपने ग्राहकों को सूचित किया है कि मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण वह अपने उर्वरक संयंत्रों को रीगैसीफाइड LNG की आपूर्ति नहीं कर पाएगी। पाकिस्तान भी अपनी अधिकांश LNG कतर से प्राप्त करता है, और यह रोक बुधवार आधी रात से प्रभावी हो गई है।
भारत के लिए बढ़ती चिंताएं और आगे की राह
भारत के उर्वरक मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यूरिया उत्पादन में कटौती पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि भू-राजनीतिक स्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और फिलहाल गैस आपूर्ति में कोई कमी नहीं है। हालांकि, फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के महानिदेशक सुरेश कुमार चौधरी के अनुसार, तत्काल मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। चौधरी ने मंगलवार को एक साक्षात्कार में कहा, “हमें पूरी उम्मीद है कि युद्ध जल्द ही खत्म हो सकता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि, “अगर युद्ध जारी रहता है, तो यह हमारे लिए चिंता का विषय होगा,” हालांकि उन्होंने अधिक विवरण नहीं दिए।
एक और गंभीर चिंता यह है कि यह संभावित खाद संकट खरीफ सीजन की बुवाई से ठीक पहले सामने आया है। यदि खाद की उपलब्धता में बाधा आती है, तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ेगा, जिससे खाद्य सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/। सरकार और उद्योग जगत दोनों को इस चुनौती से निपटने के लिए त्वरित और प्रभावी उपाय खोजने होंगे ताकि देश के कृषि क्षेत्र को इस भू-राजनीतिक तनाव के गंभीर परिणामों से बचाया जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





